अंबेडकरनगर। करीब 10 वर्ष पूर्व हंसवर थाना क्षेत्र के एक गांव से नाबालिक बालिका के अपहरण व दुष्कर्म मामले में अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम फरीदा बेगम ने दो दोषियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों दोषियों पर 45-45 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। अपने आदेश में कहा कि संबंधित जुर्माने की रकम 50 प्रतिशत पीड़िता को बतौर प्रतिकर देने का निर्देश दिया है। कहा कि यदि जुर्माने की रकम न अदा की गई तो 2 माह के अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी।
बताते चलें कि हंसवर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने हंसवर थाने में 22 मार्च 2011 को एक मुकदमा दर्ज कराया था। बताया कि उसकी 16 वर्षीय पुत्री 15 मार्च को घर से स्कूल प्रवेश पत्र लेने के लिए गई थी। इसके बाद वह नहीं लौटी। बाद में खोजबीन केे बाद पता चला कि उसकी पुत्री को मूसेपुर कला निवासी राजेन्द्र यादव व रणविजय उर्फ घपलू आदि ने उसकी पुत्री का अपहरण कर लिया। पुलिस ने मामले में अपहरण व दुष्कर्म आदि की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर छानबीन शुरु की। बालिका को बरामद करने के साथ ही पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजा।
इस बीच मामला सत्र परीक्षण के लिए अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रथम फरीदा बेगम के समक्ष पेश हुआ। जिला सहायक शासकीय अधिवक्ता ने अभियोजन पक्ष की तरफ से कई गवाह व साक्ष्य पेश किए। गवाहों व सुबूतों के आधार पर अपर सत्र न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट ने राजेन्द्र यादव व रणविजय को दोषी पाया। दोनों दोषियों पर अपहरण, दुष्कर्म व अन्य धाराओं में 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर अलग अलग धाराओं में 45-45 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। कहा कि यदि जुर्माने की रकम न अदा की गई तो दोषियों को दो माह के अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा भुगतनी होगी। साथ ही आदेश में कहा कि जुर्माने की 50 प्रतिशत धनराशि पीड़िता को बतौर प्रतिकर दिया जाए।