18 नवंबर को पूरामुफ्ती थाने में यह मुकदमा दर्ज हुआ था। देखरेख के लिए तैनात माबूद ने आरोप लगाया था कि मुतवल्ली ने अन्य आरोपियों से सांठगांठ करके वक्फ की संपत्ति पर अवैध तरीके से कब्जा किया और फिर इसे बेच दिया।
वक्फ की 50 करोड़ की संपत्ति पर अवैध कब्जा कर बेचने के छह आरोपियों को पुलिस डेढ़ महीने बाद भी नहीं पकड़ सकी है। माफिया अशरफ की पत्नी जैनब व साला जैद तो पकड़े नहीं ही जा सके हैं। थाने से कुछ किमी दूर हटवा गांव का रहने वाला हिस्ट्रीशीटर प्रधान सिवली भी चकमा देर रहा है। इस पूरे फर्जीवाड़े में मुख्य किरदार मुतवल्ली असियम व उसकी पत्नी जिन्नत समेत तीन अन्य आरोपियों का भी पता पुलिस अब तक नहीं लगा पाई है।
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18 नवंबर को पूरामुफ्ती थाने में यह मुकदमा दर्ज हुआ था। देखरेख के लिए तैनात माबूद ने आरोप लगाया था कि मुतवल्ली ने अन्य आरोपियों से सांठगांठ करके वक्फ की संपत्ति पर अवैध तरीके से कब्जा किया और फिर इसे बेच दिया। प्रारंभिक जांच पड़ताल में यह बात भी सामने आई कि इस संपत्ति को न सिर्फ अवैध तरीके से बेचा गया बल्कि इस पर दुकान व गोदाम बनवाकर लाखों रुपये महीने का किराया भी वसूला जा रहा था। इसी संपत्ति पर बने आलीशान मकान को जैनब ने अपना ठिकाना बनाया हुआ था जिसे पुलिस ने चार दिसंबर को कुर्क कर दिया।
मुकदमा दर्ज हुए डेढ़ महीने बीत चुके हैं लेकिन अब तक किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई। पहले से ही जेल में बंद अशरफ के साले सद्दाम के खिलाफ पुलिस ने बी वारंट जारी कराया है। हालांकि अन्य आरोपी पकड़े नहीं जा सके हैं। यहां तक कि दर्जनों मुकदमों का अपराधी सिवली भी पकड़ा नहीं जा सका है। एसीपी वरुण कुमार का कहना है कि हर संभावित ठिकाने पर दबिश दी जा रही है। उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी कराने के लिए भी विधिक कार्रवाई की जाएगी।