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UP : अतीक पर ईडी का केस होते ही जफर ने रियल एस्टेट कंपनी से बना ली थी दूरी, माफिया के दम पर कब्जाता था जमीनें

Sun, 06 Aug 2023 02:19 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

हिमालया व्यू प्रॉपर्टी कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड से नाम हटाने का खालिद जफर ने यह दांव अतीक अहमद पर मनी लांड्रिंग का अप्रैल 2021 में केस दर्ज होते ही किया। जफर ने 25 अगस्त 2011 को बनाई इस कंपनी का पता एचआईजी 71, कालिंदीपुरम लिखाया था।
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अतीक अहमद - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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दो साल पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अतीक अहमद पर मनी लांड्रिंग का केस दर्ज कराते ही उसके बहनोई के दामाद खालिद जफर ने खुद की बनाई कंपनी हिमालया व्यू प्रॉपर्टी कंसल्टेंट के सारे दायित्वों से खुद को अलग कर लिया था। यह इसलिए कि माफिया की आड़ में धंधा तो चंगा चले, लेकिन कार्रवाई की आंच न आए। जफर ने अपने बहनोई मोहम्मद इरफान हसन समेत तीन लोगों को कंपनी में निदेशक बनवा कर पर्दे के पीछे से नियंत्रण जारी रखा।

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शनिवार को हसन को जेल भेजा गया है।हिमालया व्यू प्रॉपर्टी कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड से नाम हटाने का खालिद जफर ने यह दांव अतीक अहमद पर मनी लांड्रिंग का अप्रैल 2021 में केस दर्ज होते ही किया। जफर ने 25 अगस्त 2011 को बनाई इस कंपनी का पता एचआईजी 71, कालिंदीपुरम लिखाया था।

आज भी इसी पते से कंपनी चालू है। दस्तावेजी तौर पर जफर दूर है। पर, हकीकत में नहीं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक जफर ने छह अप्रैल 2021 को पहले अपने बहनोई इरफान को निदेशक बनवाया, फिर सुशील रावत को। तीन महीने बाद 22 जुलाई 2021 को अबू तालिब को भी निदेशक बना दिया गया।

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कंपनी इन निदेशकों के जरिये दो अन्य कंपनियों से जुड़ी है। इसमें सर्वाधिक हिस्सेदारी इरफान की है। चौंकाने वाली बात यह भी है कि रियल इस्टेट से संबंधित इस कंपनी में प्रबंधन का कोई व्यक्ति नियुक्त नहीं है। सूत्रों का कहना है कि यह खालिद की ही चाल है। वही पर्दे के कंपनी चलाता है। यह लोग अतीक के नाम पर गरीबों की जमीनें जबरन या औने-पौने दामों पर कब्जा कर कंपनी के नाम करा लेते थे। फिर, ऊंचे दामों पर प्लॉटिंग करते थे।

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उमेश पाल लगाते रह गए गुहार, नहीं कसा शिकंजा

जिस खालिद जफर का नाम उमेश पाल हत्याकांड के बाद चर्चा में आया, उस पर धूमनगंज पुलिस पूरी तरह मेहरबान रही। उमेश पाल खुद गुहार लगाते रह गए, लेकिन उस पर शिकंजा नहीं कसा गया। पिछले साल अगस्त में उमेश ने खालिद जफर, मो. मुस्लिम, अबू साद समेत अन्य पर एक करोड़ रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोपियों पर उसकी पीपलगांव स्थित जमीन कब्जाने और एक करोड़ की रंगदारी मांगने का आरोप था।

11 महीने बीत चुके हैं, लेकिन इस केस में कोई कार्रवाई नहीं की गई। मई में भी खालिद जफर, मो. मुस्लिम समेत अन्य पर 20 लाख रंगदारी मांगने का एक मुकदमा सूरज पाल ने दर्ज कराया। इसमें भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। सूत्रों का यहां तक कहना है कि मुकदमे से रंगदारी मांगने की धारा ही हटा दी गई है। हालांकि, अधिकारी पूरे मामले में कोई बात बताने के लिए तैयार नहीं हैं।

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