कंपनी इन निदेशकों के जरिये दो अन्य कंपनियों से जुड़ी है। इसमें सर्वाधिक हिस्सेदारी इरफान की है। चौंकाने वाली बात यह भी है कि रियल इस्टेट से संबंधित इस कंपनी में प्रबंधन का कोई व्यक्ति नियुक्त नहीं है। सूत्रों का कहना है कि यह खालिद की ही चाल है। वही पर्दे के कंपनी चलाता है। यह लोग अतीक के नाम पर गरीबों की जमीनें जबरन या औने-पौने दामों पर कब्जा कर कंपनी के नाम करा लेते थे। फिर, ऊंचे दामों पर प्लॉटिंग करते थे।
उमेश पाल लगाते रह गए गुहार, नहीं कसा शिकंजा
जिस खालिद जफर का नाम उमेश पाल हत्याकांड के बाद चर्चा में आया, उस पर धूमनगंज पुलिस पूरी तरह मेहरबान रही। उमेश पाल खुद गुहार लगाते रह गए, लेकिन उस पर शिकंजा नहीं कसा गया। पिछले साल अगस्त में उमेश ने खालिद जफर, मो. मुस्लिम, अबू साद समेत अन्य पर एक करोड़ रंगदारी मांगने का मुकदमा दर्ज कराया था। आरोपियों पर उसकी पीपलगांव स्थित जमीन कब्जाने और एक करोड़ की रंगदारी मांगने का आरोप था।
11 महीने बीत चुके हैं, लेकिन इस केस में कोई कार्रवाई नहीं की गई। मई में भी खालिद जफर, मो. मुस्लिम समेत अन्य पर 20 लाख रंगदारी मांगने का एक मुकदमा सूरज पाल ने दर्ज कराया। इसमें भी उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। सूत्रों का यहां तक कहना है कि मुकदमे से रंगदारी मांगने की धारा ही हटा दी गई है। हालांकि, अधिकारी पूरे मामले में कोई बात बताने के लिए तैयार नहीं हैं।