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आंदोलन की अलख के अगुआ रहे युवा

Sun, 09 Aug 2015 02:33 AM IST
सुरभि गुप्ता/अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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इलाहाबाद। आजादी के आंदोलन में इलाहाबाद की अहम भूमिका रही है। स्वतंत्रता संग्राम में हर छोटे-बड़े ने बेखौफ होकर हिस्सा लिया था। इलाहाबाद में महात्मा गांधी के भारत छोड़ो आंदोलन की अलख इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने जगाई थी। उनके आंदोलन की आग इतनी तेज थी कि उसे बुझाने में अंग्रेजी हुकूमत के छक्के छूट गए थे। आंदोलन के दौरान ही हाथों में तिरंगा लेकर लाल पद्मधर सीने पर गोली खाकर शहीद हुए थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रावास, आंदोलन की रणनीति तय करने के केंद्र बने।
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नौ अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा के क्रम में दस अगस्त को संगमनगरी में चिनगारी भड़की। 11 अगस्त को सैदाबाद के किसान सियांबर, चंद्रमा प्रसाद, दयाल, सुबोध शहीद हुए। अगले दिन 12 अगस्त को कलेक्ट्रेट पर तिरंगा फहराने के लिए विद्यार्थियों का हुजूम छात्रसंघ भवन से निकला। खास यह कि तिरंगे के साथ लड़कियां सबसे आगे रहीं।

‘अंग्रेजों भारत छोड़ो, हिंदुस्तान हमारा है’ के नारे लगाते हुए जुलूस कचहरी पहुंचा तो वहां पुलिस ने घेराबंदी करके उन्हें रोकने की कोशिश की। डीएम ने जुलूस के वापस न लौटने पर गोली चलाने की चेतावनी दी लेकिन जोश से लबरेज युवा बिना डरे आगे बढ़ते रहे। गुस्से में डीएम ने गोली चलाने का हुक्म दिया। इसी बीच जुलूस में बीए के छात्र लाल पद्मधर आगे आ गए और तिरंगा हाथों में लेते हुए बोले, ‘लड़कियों पर क्या मेरे ऊपर गोली चलाओ’ और डीएम ने कह दिया, ‘शूट हिम’। इतना सुनते ही पुलिस ने गोली चला दी। गोली पद्मधर के सीने में लगी और वह वहीं शहीद हो गए।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय इतिहास विभाग के प्रोफेसर योगेश्वर तिवारी के मुताबिक शहीद पद्मधर के पार्थिव शरीर को लेकर छात्र, छात्रसंघ भवन आ गए। उनका पार्थिव शरीर लेने के लिए पुलिस भी पहुंची लेकिन उसे विश्वविद्यालय गेट के भीतर जाने की अनुमति नहीं मिली। पुलिस कुलपति अमरनाथ झा के पास गई, लेकिन उन्होंने भी अनुमति नहीं दी और पुलिस को लौटना पड़ा। जुलूस में एनडी तिवारी, हेमवती नंदन बहुगुणा, चंद्रभूषण त्रिपाठी, कमला बहुगुणा, राज मंगल पांडेय समेत सैकड़ों युवाओं ने भाग लिया था। घटना के बाद छात्रसंघ भंग कर दिया गया था जो 1945 में बहाल हुआ।

इलाहाबाद के इतिहास पर अध्ययन करने वाले इलाहाबाद विश्वविद्यालय के राजभाषा के अनुभाग अधिकारी अखिलेश श्रीवास्तव के मुताबिक लाल पद्मधर के शहीद होने के अगले दिन से शहर में मानो कोहराम मच गया। आक्रोशित युवाओं ने कर्नलगंज थाने और दारागंज में एंबुलेंस में आग लगा दी। गुस्साए युवाओं के आगे अंग्रेजी पुलिस बेबस साबित हुई। शाम को कफ्यू की घोषणा करके मिलेट्री फोर्स बुला ली गई। मिलेट्री लगने के बाद भी आंदोलन की आंच कम नहीं हुई बल्कि अंग्रेजों और युवाओं के बीच लुकाछिपी का खेल जारी रहा।

0 11 अगस्त 1942: सियांबर, चंद्रमा प्रसाद, दयाल, सुबोध-सैदाबाद के किसान
0 12 अगस्त 1942: लाल पद्मधर सिंह-कचहरी के पास/अहियापुर के रमेश दत्त मालवीय और बैजनाथ प्रसाद गुप्त/बक्शी बाजार के ननकाजी
0 13 अगस्त 1942: मुरारी मोहन भट्टाचार्या-शाहगंज, भगवती प्रसाद-बादशाही मंडी, अब्दुल मजीद-सब्जीमंडी
0 14 अगस्त 1942: द्वारिका प्रसाद-हीवेट रोड, ललता मिश्र-करछना के करमा गांव निवासी
0 17 अगस्त 1942: महावीर-कीडगंज
0 24 अगस्त 1942: हजारी राम पांडेय-हंडिया के बनकट निवासी
00 अगस्त क्रांति की याद में कई कार्यक्रम
इलाहाबाद। भारत छोड़ो आंदोलन की याद में रविवार को शहर भर में विविध कार्यक्रम होंगे। स्वराज विद्यापीठ की ओर से सात दिन स्वराज महोत्सव की शुरुआत संस्था भवन में शाम चार बजे होगी। उद्घाटन कुलपति प्रो.एनआर फारूकी करेंगे। इसी क्रम में निम्नलिखित कार्यक्रम होंगे।
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0 अंतरराष्ट्रीय वैश्य परिषद की ओर से चौक स्थित नीम के पेड़ के नीचे श्रद्धांजलि समारोह शाम 6 बजे।
0 राष्ट्रीय क्रांतिकारी मोर्चा की ओर से चौक स्थित नीम के पेड़ के नीचे, शाम 6.15 बजे।
0 राजनैतिक बंदी समिति की ओर से बलुआघाट रोड पर सुबह 11 बजे।
0 जनहित संघर्ष समिति की ओर से श्रद्धांजलि समारोह चंद्रशेखर आजाद पार्क में शाम 6 बजे
0 जन संघर्ष मोर्चा की ओर से पीडब्ल्यूडी मिनिस्ट्रीरियल संघ भवन में वंचितो की लोकतंत्र में भूमिका विषय पर संगोष्ठी दोपहर एक बजे।
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