विश्व मोटापा दिवस सोमवार को है। इस बार की थीम आइए मोटापे पर खुलकर बात करें रखी गई है। मोटापे की वजह से बीपी, शुगर, सांस से संबंधित बीमारी व अन्य प्रकार की समस्याएं जन्म लेती हैं। लेकिन, अब 10 व 12 वर्ष के बच्चे भी इसकी वजह से टाइप टू मधुमेह की चपेट में आ रहे हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह से जंक फूड बताई जा रही है।
लोग जंक फूड पिज्जा, बर्गर, चाऊमीन व अन्य प्रकार के खाद्य पदार्थों को मानते हैं। जबकि, जंक फूड की श्रेणी में बिस्कुट, नमकीन और टोस्ट भी आता है। एसआरएन अस्पताल में हर माह पांच से छह केस इस प्रकार के आ रहे हैं। वहीं, निजी अस्पतालों में भी स्थिति ऐसी ही देखने को मिल रही है।
प्रीतम नगर निवासी 15 वर्षीय एक किशोर का वजन 75 किलो था। इसकी वजह से उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। वहीं, मुंडेरा स्थित नारायण स्वरूप अस्पताल में जब उसे लाया गया तो जांच में पता चला कि उसका शुगर लेवल 500 के ऊपर है। ऐसे में उसे तुरंत भर्ती करना पड़ा। एक हफ्ते इलाज चलने के बाद मधुमेह नियंत्रित कर सके।
कैसे करें नियंत्रित
1-जंक फूड कम दें
2-कम से कम दो घंटे आउट डोर गेम खेलें
3-पौष्टिक आहार दें
4-रात में 10 बजे तक सोना और सुबह छह बजे तक उठ जाएं
5-मोबाइल पर आधा घंटे से अधिक समय न दें
बच्चों में मोटापे की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जो काफी चिंता का विषय है। खासतौर से जो बच्चे थोड़ा अमीर परिवार से होते हैं, उनमें यह समस्या अधिक देखने को मिलती है। जंक फूड पर नियंत्रण करना बहुत जरूरी है। - डॉ.राजेश यादव, बाल रोग विशेषज्ञ, सरोजनी नायडू बाल चिकित्सालय
15 से 16 वर्ष की उम्र में बच्चों का वजन 70 किलो के ऊपर जा रहा है। सिकी वजह से शुगर, बीपी, पाइल्स, ह्दय रोग, अस्थमा सहित अन्य बीमारियों का खतरा बन रहा है। हमारे यहां इस प्रकार के कई मामले हर महीने आते हैं। - डॉ. राजीव सिंह, निदेशक, नारायण स्वरूप अस्पताल