फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व कैंसर दिवस विशेष : इच्छा शक्ति हो तो कैंसर के चौथे स्टेज से भी लड़ सकता है मरीज

Sun, 04 Feb 2024 02:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. राधा केसरवानी का कहना है कि कई ऐसे मामले उनके सामने आए हैं, जहां उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी। लेकिन मरीज की इच्छा शक्ति कैंसर पर भारी पड़ी है।
विज्ञापन
सर्वाइकल कैंसर। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जीने की इच्छा शक्ति हो तो गंभीर बीमारियां भी हार जाती हैं। कैंसर के चौथे स्टेज को भी लोग मात देने की ओर बढ़ रहे हैं। स्वरूप रानी नेहरू चिकित्सालय (एसआरएन) के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की अध्यक्ष डॉ. राधा केसरवानी का कहना है कि कई ऐसे मामले उनके सामने आए हैं, जहां उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी। लेकिन मरीज की इच्छा शक्ति कैंसर पर भारी पड़ी है।

विज्ञापन


केस नंबर 1- मिर्जापुर निवासी 23 वर्षीय एक युवक को ब्रेन ट्यूमर था। वह पिछले वर्ष मई में इलाज कराने एसआरएन आया था। जांच में पता चला कि उसका कैंसर चौथी स्टेज पर है। बचना मुश्किल था। आज वह पहले से बेहतर स्थिति में है। पहले एक कदम नहीं चल पाता था। अब चलने लगा है। उसका सिर भी ठीक हुआ है।

केस नंबर 2- मिर्जापुर के 27 वर्षीय युवक को गले का कैंसर था। उसकी गर्दन तक सीधी नहीं हो पाती थी। पिछले वर्ष अप्रैल में जब उसे अस्पताल लाया गया तो हालत काफी गंभीर थी। सिकाई के कारण उसकी रिकवरी शुरू हो गई। इस दौरान कीमोथेरेपी भी हुई। अब मरीज पहले से ज्यादा बेहतर स्थित में है।
विज्ञापन


केस नंबर 3- कौशांबी निवासी 10 वर्षीय बच्ची को ब्रेन ट्यूमर था। जब उसे पिछले साल मई में अस्पताल लाया गया तो कोमा में थी। सिकाई और कीमोथेरेपी शुरू की गई। बच्ची को तीन दिन बाद होश आ गया। इसके बाद उसकी रिकवरी तेजी से होने लगी। आज वह लड़की पूरी तरह से स्वस्थ्य है।

विज्ञापन

कम उम्र में भी ब्रेस्ट कैंसर का खतरा

एसआरएन अस्पताल के कैंसर रोग विभाग में एक बीस वर्षीय युवती में ब्रेस्ट कैंसर पाया गया। चिकित्सकों का कहना है कि ब्रेस्ट कैंसर का एक कारण अनुवांशिकी भी होता है। इसके अलावा देर से शादी होना, जंक फूड का सेवन व व्यायाम न करना भी एक कारण है।

हर महीने 90 से 100 मरीज माउथ कैंसर केएसआरएन के कैंसर रोग विभाग में सबसे ज्यादा मामले माउथ कैंसर के हैं। हर महीने लगभग 90 से 100 मरीज माउथ, 40 से 50 मरीज ब्रेस्ट और पित्त की थैली में कैंसर के 20 से 30 मरीज हर महीने इलाज कराने आते हैं।

कैंसर के अधिकतर मरीज तीसरी व चौथी स्टेज में इलाज कराने आते हैं, जिससे उनके ठीक होने की संभावना काफी कम रहती है। इनमें से अधिकतर मरीज जागरूकता के अभाव में झोलाछाप के चक्कर काटते रहते हैं। इस वजह से देर हो जाती है। - डॉ. राधा केसरवानी, विभागाध्यक्ष, रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, एसआरएन।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें