Mahadevi Verma : आधुनिक युग की मीरा कही जाने वालीं महादेवी वर्मा लकड़ी के एक तख्त पर सोती थीं और अपना ज्यादातर लेखन रात्रि के दूसरे पहर में करती थीं। गंभीर विषयों पर लिखने वाली महादेवी अक्सर अपनों के साथ चर्चा के दौरान बहुत खिलखिलाकर हंसती थीं। आज जब प्रकृति से छेड़छाड़ के भयावह परिणाम पहाड़ पर देखने को मिल रहे हैं, तब प्रयागराज में 11 सितंबर 1987 को अंतिम सांस लेने वालीं पद्म विभूषण महादेवी वर्मा के संग्रह ''हिमालय'' और कहानी ''गिल्लू'' जैसी रचनाएं फिर से प्रासंगिक हो उठी हैं।