सर्दी में किसानों को दोहरी मार पड़ रही है। शीतलहर के कारण लोग शाम होते-होते अपने घरों में दुबक जाते हैंं। दूसरी तरफ लावारिस पशुओं से किसानों की सर्द रातें खेती की पहरेदारी में कट रही हैं।
लावारिस पशुओं के झुंड जहां से भी गुजरतें हैं, वहां की खड़ी फसलों को कुछ ही देर में चौपट कर देते हैं। इनमें सबसे अधिक संख्या देशी गाय व बछड़ों की है। हालत ऐसी है कि किसान दिन रात खेतों में पहरा देते हैं और जरा सी लापरवाही होेते ही ये पशु पूरी फसल को नष्ट कर देते हैं।
बता दें कि कोरांव का बड़ोखर और महुली क्षेत्र पहले से ही नीलगाय से परेशान था और अब लावारिस पशुओं ने किसानों का चैन छीन लिया हैं। किसान जवाहर लाल, सुनील मौर्या, शिव सागर और रमेश सिंह आदि ने बताया कि हर गांव में सैकड़ों की संख्या में लावारिस पशु घूम रहे हैं।
खेतों में इन दिनों गेहूं, सरसों और चना आदि फसलों की बोआई हो गई है, लेकिन पशुओं की टोलियां चंद मिनटों में ही पूरे खेत में खड़ी फसल को बर्बाद कर देते हैं।
दिनभर खेतों में कार्य करने वाले किसानों को रात को सर्दी की परवाह किए बिना इनसे अपनी फसलों की रक्षा के लिए अलाव जलाना पड़ता है।