पाठा क्षेत्र के कोरांव विधानसभा क्षेत्र में पहली बार कमल खिला। भाजपा के राजमणि कोल ने रिकार्ड 100427 हासिल किए। कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कोरांव में जिले की एकमात्र चुनावी सभा को संबोधित किया था, लेकिन वह पार्टी के प्रत्याशी रामकृपाल की जिले की सबसे बड़ी हार को नहीं टाल पाए। मेजा विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके सपा समर्थित कांग्रेस के रामकृपाल को मात्र 46731 वोट मिले और वह भाजपा प्रत्याशी से 53696 मतों से पीछे रह गए। निवर्तमान विधायक बसपा के राजबली जैसल को मात्र 26056 वोट मिले और वह जमानत भी नहीं बचा पाए। कांग्रेस से समझौता के बावजूद सपा ने रामदेव को प्रत्याशी बनाया था। हालांकि बाद में उन्होंने रामकृपाल को समर्थन दे दिया था। फिर भी उन्हें 3958 वोट ही मिले हैं।
कोरांव (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र 2009 में अस्तित्व में आया था। पहले यह मेजा विधानसभा था। भाजपा ने मेजा में भी कभी जीत हासिल नहीं की थी। पूरे पाठा क्षेत्र में वामपंथ की मजबूत पकड़ रही है और रामकृपाल सीपीएम से दो बार विधायक रहे, लेकिन वह इस बार कांग्रेस के टिकट से मैदान में थे। वहीं बसपा के राजबली लगातार दो बार से विधायक रहे, लेकिन इस बार वह तीसरे स्थान पर चले गए। पिछले चुनाव में बसपा के राजबली विजयी हुए थे तो सीपीएम के प्रत्याशी रहे रामकृपाल दूसरे तथा भाजपा प्रत्याशी दीपांशु कोल 30530 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे, लेकिन क्षेत्र के दिग्गजों के बीच पहली बार कोई चुनाव लड़ रहे राजमणि सभी 24 चरण की मतगणना में प्रतिद्वंदी प्रत्याशियों से आगे रहे।
लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा प्रत्याशी श्यामा चरण गुप्त को सबसे अधिक 60447 वोट मिले थे। राजमणि को इससे भी तकरीबन 40 हजार अधिक वोट मिले हैं। मोदी लहर के साथ स्वच्छ और सादगी वाली छवि का राजमणि की जीत में बड़ा योगदान रहा। वरिष्ठ नेता डॉ.मुरली मनोहर जोशी के करीबी राजमणि 30 वर्ष से भाजपा में सक्रिय हैं। स्थानीय लोगों की मदद से उन्होंने स्कूल खोला। दौखल में परमसुख आदिवासी इंटर कॉलेज और स्कूल के प्रधानाचार्य राजमणि की क्षेत्र में खासा पहचान है।
क्षेत्र में सबसे ज्यादा करीब एक लाख आदिवासी मतदाता हैं। पिछड़ी जाति के मतदाताओं की संख्या भी 60 हजार है, जिनमें यादवों की संख्या ज्यादा है। करीब 50 हजार दलित और इतने ही ब्राह्मण मतदाता हैं। अन्य जाति के मतदाताओं की संख्या 40 हजार के करीब है। जातीय समीकरण के तहत कोल और दलित मतदाताओं को साधने के लिए भाजपा ने राजमणि को प्रत्याशी बनाया। कांग्रेस ने भी सीपीएम को छोड़कर आए रामकृपाल कोल को उम्मीदवार बनाया। राहुल गांधी ने चुनावी सभा में कोल बिरादरी को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने का भी वादा किया, लेकिन रिकार्ड मत मिलने से साफ है कि कोल तथा बसपा की परंपरागत वोट बैंक में सेंधमारी के साथ राजमणि अन्य बिरादरियों को भी खींचने में सफल रहे।
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पहले पांच स्थान पर रहे प्रत्याशियों को मिले वोट
राजमणि कोल - 100427
रामकृपाल - 46731
राजबली जैसल - 26056
धर्मराज - 5134
रामदेव - 3958
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0 भाजपा के राजमणि कोल ने कांग्रेस के रामकृपाल कोल को 53696 मतों से हराया
0 कांग्रेस समझौता के बावजूद मैदान में रहे सपा के रामदेव को 3958 वोट मिले
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अन्य प्रत्याशियों को मिले वोट
- कोरांव विधानसभा क्षेत्र में कुल 13 प्रत्याशी मैदान में थे। इनमें से सीपीएम के चिरौंजी लाल को 1861, राष्ट्रीय लोकदल की मायावती को 983, भारतीय शक्ति चेतना पार्टी के अखिलेश कुमार को 1285, सीपीआई (एमएल) के पंचम लाल को 907, जन अधिकार पार्टी के रंगलाल को 1083, आदिम समाज पार्टी के रवि शंकर 1136, बहुजन मुक्ति पार्टी के शिव जनक को 2214, निर्दलीय तेजबली को 1244 वोट मिले। 3208 मतदाताओं ने नोटा का उपयोग किया।
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लोगों का वादा करूंगा पूरी
‘लोगों से किया वादा पूरा करूंगा। बिजली, पानी, स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क क्षेत्र की मुख्य समस्याएं हैं। इसके लिए संघर्ष करूंगा। युवाओं को रोजगार, बिना ब्याज के कृषि ऋण, उचित मजदूरी दिलाना उनकी प्राथमिकता है। केंद्र के साथ प्रदेश में भी भाजपा सरकार होगी। उम्मीद है क्षेत्र के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने में सफल रहूंगा।’
राजमणि कोल
प्रोफाइल
- 52 वर्ष के राजमणि संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्याल वाराणसी से परास्नातक हैं। वह शिक्षक हैं और उनके तथा आश्रितों के नाम पर सात लाख 24 हजार रुपये की संपत्ति है। वह 30 वर्ष से भाजपा के सक्रिय सदस्य हैं। राजमणि पर कोई भी मुकदमा नहीं है। बड़े पुत्र संतोष भी पढ़ाते हैं। छोटे पुत्र रघुवंश परास्नातक के बाद नौकरी की तलाश में हैं।