बारिश और ओलावृष्टि से भारी संकट में आए गन्ना किसानों को हाईकोर्ट ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि पेराई सत्र के बीच में कोई भी मिल बंद न की जाए जब तक की गन्ने की पेराई पूरी नहीं हो जाए। यदि मिल बीच में बंद की जाती है तो मिल मालिक को खड़े गन्ने का मूल्य किसान को देना होगा। कोर्ट ने यह आदेश याची वीएम सिंह की इस शिकायत के बाद दिया जब उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में 119 चीनी मिलों से 29 मिलें बंद कर दी गई थीं, क्योंकि किसान गन्ने का भुगतान मांग रहे थे। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल की खंडपीठ ने भुगतान नहीं करने वाली मिलों को कड़ी चेतावनी भी दी है।
याची वीएम सिंह का आरोप था कि किसानों के पैसा मांगने पर मिल मालिक उनको मिल बंद कर देने की धमकी देते हैं। मिल बंद होने से किसान को मजबूरी में गन्ना सस्ते दाम में दूसरी मिलों या दलालों के हाथ बेचना पड़ता है। कई किसान खेत में ही गन्ना जला देते हैं। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पेराई सत्र के बीच में कोई मिल बंद नहीं की जाएगी। बकाया भुगतान के मसले पर वीएम सिंह ने बताया कि कुल 10 हजार करोड़ रुपये में से अब 322 करोड़ शेष बचे हैं, शेष राशि का भुगतान हो गया है।
मवाना सुगर मिल पर 194 करोड़ रुपये और मोदी की दो मिलों पर 125 करोड़ रुपये बकाया हैं। मवाना और मोदी मिलों ने कोर्ट में पहले तो भुगतान कर पाने में असमर्थता जताई। उन्होंने बताया कि चीनी बिक नहीं पाने की वजह से भुगतान के लिए पैसे नहीं है। मगर अदालत का रुख काफी सख्त रहा। खंडपीठ ने मवाना मिल को 50 करोड़ रुपये और मोदी की एक कंपनी को 37 करोड़ का भुगतान 20 अप्रैल तक करने का निर्देश दिया। मोदी की दूसरी कंपनी मलिकपुर पर 88 करोड़ रुपये बकाया था उसने भी अंडरटेकिं ग दी कि 21 अप्रैल तक 44 करोड़ रुपये का भुगतान कर देंगे। गोदारा सुगर मिल का 5.78 करोड़ रुपये बकाया एक सप्ताह में करने की अंडरटेकिंग दी है। एक अन्य मिल ने 12 करोड़ रुपये का पोस्ट डेटेड चेक दिया।