Half Marathon organized in Ballia
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महाराष्ट्र की ज्योति शंकर गवते सोमवार को अखिल भारतीय प्राइजमनी इंदिरा मैराथन में डबल हैट्रिक का लक्ष्य लेकर दौड़ेंगी। अगर वह लक्ष्य पूरा कर लेती हैं तो भैरो सिंह लोने के 13 साल पुराने रिकार्ड को तोड़ते हुए मैराथन में एक नया इतिहास रचेंगी। गवते के साथ पिछले साल के विजेता सेना के रशपाल सिंह पर भी सबकी नजर रहेगी। इस बार भी सेना के धावक जोरदार तैयारियों के साथ मैराथन में शामिल होने आए हैं। ऐसे में पुरुष वर्ग का परिणाम काफी कुछ पिछले साल जैसा होने के आसार हैं, जब श्रेष्ठ तीन स्थानों पर सेना के धावकों ने ही कब्जा किया था।
सोमवार सुबह 6.30 बजे आनंद भवन से 42.195 किमी की मैराथन को डीएम सुहास एलवाई हरी झंडी दिखाएंगे जबकि मदन मोहन मालवीय स्टेडियम में समापन समारोह के मुख्य अतिथि सांसद श्याम चरण गुप्त विजेताओं को पुरस्कार वितरित करेंगे। महिला वर्ग में लगातर पांच वर्षों से विजेता महाराष्ट्र की ज्योति शंकर गवते की रविवार को हुई इंट्री से मैराथन का रोमांच बढ़ गया है। पुरुष वर्ग में अब तक यह उपलब्धि भैरो सिंह लोने के नाम पर है, जो वर्ष 2000-01 से 2004-05 तक लगातार पांच साल इंदिरा मैराथन के विजेता रहे। वर्ष 2005-06 में केसी रामू ने उन्हें डबल हैट्रिक से रोक दिया था लेकिन वर्ष वर्ष 2006-07 में लोने ने सर्वाधिक छह बार मैराथन का विजेता होने का रिकार्ड अपने नाम किया। गवते अगर सोमवार को सबसे तेज धाविका साबित होती हैं तो मैराथन का 34वां संस्करण नए इतिहास का गवाह बनेगा।
इन सबके बीच हाथरस जिले के मुरसान से आईं अनीता चौधरी से गवते को चुनौती मिल सकती है। अनीता पिछली बार दूसरे स्थान पर थीं। वह मैराथन के दौरान ठोकर खाकर गिर पड़ीं थीं और चोटिल हो गईं थीं। वहीं, पुरुष वर्ग में गत वर्ष के विजेता सेना के रशपाल सिंह पर भी सबकी नजर होगी। रशपाल वर्ष 2013-14 में भी मैराथन के विजेता रह चुके हैं। हालांकि उन्हें सेना के ही अन्य धावकों से तगड़ी चुनौती मिल सकती है। पिछले साल की तरह इस बार भी सेना के धावक जोरदार तैयारी के साथ मैराथन में शामिल होने पहुंचे हैं। इनमें से कुछ छिपे रुस्तम भी साबित हो सकते हैं।
इंदिरा मैराथन वर्ष 1985 में जब शुरू हुई तो पुरुष वर्ग विजेता के लिए इनामी राशि 51 हजार और महिला वर्ग के लिए 21 हजार रुपये निर्धारित की गई थी लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इस पर आपत्ति की और महिला वर्ग की पुरुस्कार राशि भी बढ़वाकर 51 हजार रुपये की। वरिष्ठ पत्रकार इंद्र कांत मिश्र बताते हैं कि स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में शाम को पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। पुरुष विजेता को पुरस्कार देने के बाद जब महिला विजेता को पुरस्कार लेने के लिए बुलाया गया तो राजीव गांधी पुरस्कार राशि में अंतर सुनकर चौंक पड़े। उन्होंने मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह की तरफ देखकर पूछा कि पुरुष और महिला विजेता की प्राइजमनी में इतना अंतर क्यों हैं। वीर बहादुर सिंह ने खेल मंत्री डॉ. संजय सिंह की तरफ देखा। संजय सिंह ने मंच के दायीं ओर नीचे बैठे खेल निदेशक डॉ. दर्शन कुमार टंडन को बुलाया। फिर संजय सिंह ने राजीव के पास जाकर कुछ कहा। राजीव गांधी ने कहा, ‘नहीं मैराथन की दूरी कम होने से आप प्राइजमनी कैसे कम कर सकते हैं’ कुछ क्षण के लिए माहौल में सन्नाटा पसर गया। उस समय पुरुषों के लिए 42 किलोमीटर और महिलाओं के लिए 21 किलोमीटर की दूरी रखी गई थी। संजय सिंह ने तुरंत माइक से घोषणा की कि महिला विजेता को भी 51000 हजार दिए जाएंगे। इस पर महिलाओं ने जोरदार तालियां बजाईं।
इंदिरा मैराथन और क्रॉस कंट्री में सोमवार को एक साथ साढ़े हजार से अधिक धावक दौड़ेंगे। रविवार शाम 6.30 बजे तक कुल 5659 प्रविष्टियां प्राप्त हो चुकीं थी और रात 10 बजे तक प्रविष्टियों के आने का सिलसिला जारी था। मैराथन के लिए पुरुष वर्ग में 684 और महिला वर्ग में 58 प्रविष्टियां आ चुकी थीं। वहीं, 15 से 20 वर्ष आयु वर्ग में बालकों की आठ किमी दौड़ के लिए 3522 और बालिकाओं की 1318 प्रविष्टि प्राप्त हुईं थीं। वरिष्ठ खिलाड़ी पुरुष वर्ग (45 वर्ष से अधिक) में 39 आ ैर महिला वर्ग में 38 प्रविष्टियां मिलीं थीं।