अपराध का संज्ञान लेना मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र का मामला
आवेदन को न्यायिक मजिस्ट्रेट मेरठ ने स्वीकार कर लिया और संबंधित थाना प्रभारी को एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच करने का निर्देश दिया गया। मामले में आईपीसी की धारा 354, 376, 511, 504, 506, 323, 452 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। जांच अधिकारी ने आवेदक के खिलाफ आरोप पत्र प्रस्तुत किया। जिस पर संज्ञान लिया गया और आरोपित (याची) को समन जारी किया गया। याची की ओर से उसी समन के आदेश को चुनौती दी गई।
कोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि मौजूदा मामला दुर्लभतम मामलों की श्रेणी में नहीं आता है, जिसे रद्द किया जा सके। कोर्ट ने आगे कहा कि अपराध का संज्ञान लेना मजिस्ट्रेट के अधिकार क्षेत्र का मामला है और इस स्तर पर मजिस्ट्रेट को मामले के गुणदोष में जाने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने कहा आरोपों की वास्तविकता का निर्धारण आरोपी को तलब करने के स्तर पर नहीं किया जा सकता है। याची के खिलाफ प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध पाया गया है। इसे देखते हुए मौजूदा आवेदन खारिज कर दिया गया।