फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दंगल से दूर होते युवाओं में कहां से मिलेंगे दहिया

Thu, 05 Aug 2021 09:36 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • कुश्ती को लेकर कम हो रहा है युवाओं में क्रेज, ज्यादातर व्यायामशालाएं बंद 
विज्ञापन
कुश्ती - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

टोक्यो ओलंपिक में कुश्ती स्पर्धा के पुरुषों के फ्रीस्टाइल 57 किलोग्राम वर्ग के सेमीफाइनल में पहुंचकर भारतीय पहलवान रवि दहिया ने पदक पक्का करते हुए एक बार फिर पूरे देश का ध्यान कुश्ती पर केंद्रित कर दिया है। लेकिन, स्थानीय स्तर पर देखें तो कभी कुश्ती-दंगल में नाम कमाने वाले प्रयागराज में कुश्ती को लेकर युवाओं में बहुत ज्यादा क्रेज नहीं रह गया है। ऐसे में मेडल की हसरत पालने की उम्म्मीद किसके की जाए। यह चर्चा अगर शहर के प्राचीन और नामचीन लोकनाथ व्यायामशाला तथा दारागंज के रघुनाथ दास व्यामशाला तक सीमित करें तो दोनों ही जगहों पर पहले की अपेक्षा युवा, कुश्ती-दंगल से दूर होते गए हैं। वहीं शहर की ज्यादातर व्यायामशालाएं बंद हो गई हैं।
विज्ञापन


शहर की परंपरा को संजोते हुए वर्ष 1947 में लोकनाथ की घनी आबादी के बीच तत्कालीन पार्षद कल्याण चंद्र मोहिले उर्फ छुन्नन गुरु  ने लोकनाथ व्यायामशाला की स्थापना की थी। तब शहर के रईसों से लेकर आमजन तक यहां कुश्ती-दंगल का हिस्सा बनने के लिए आते थे। यहीं के भोला पहलवान ने बाजी मारते हुए  प्रदेश स्तर पर चैंपियनशिप हासिल की थी। व्यायामशाला के सचिव रामजी केसरवानी कहते हैं, जिम और ओपन एयर जिम में बढ़ोतरी के बाद अब कुश्ती के लिए आने वाले युवाओं की संख्या घटकर दस-बारह तक ही सीमित रह गई है। न पहले जैसे गुरु रहे और न ही युवाओं में सीखने की ललक ही बाकी बची है।

इसी तरह पहलवानी के नशे और जोश केसाथ दारागंज की गलियों में भी पहलवान पैदा होते रहे हैं। कभी राधारमण इंटर कॉलेज मैदान पर होने वाले दंगल में नामचीन पहलवान शामिल होते थे। मोरी स्थित श्री रघुनाथ दास व्यामशाला, वेणी माधव मंदिर के पास गौरी गुरु के अखाड़े और डॉ.प्रभात शास्त्री मार्ग, कच्ची सड़क स्थित ललाई पहलवान के अखाड़े में से अब सिर्फ रघुनाथ दास व्यायामशाला में ही प्रकाश पहलवान की अगुवाई में युवा दंगल के दांव सीखने आते हैं। प्रयागराज सेवा समिति के संयोजक तीर्थराज पांडेय ‘बच्चा भैया’ भा मानते हैं, पहले की अपेक्षा युवाओं की संख्या में कमी आई है लेकिन उन्हें राष्ट्रीय स्तर के साधन और प्रशिक्षण मिले तो उनसे कामयाबी की उम्मीद की जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें