2020 में चालानी रिपोर्ट, तब से लंबित थी कार्रवाई
माइकल पर चार साल से कार्रवाई लंबित थी। अक्तूबर 2020 में कर्नलगंज पुलिस की चालानी रिपोर्ट पर अपर जिला मजिस्ट्रेट न्यायालय ने उसके खिलाफ गुंडा एक्ट की कार्रवाई की थी। हालांकि इसके बाद आगे की काेई कार्रवाई नहीं की गई। कार्रवाई नहीं किए जाने से अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल भी उठे। उधर संबंधित फाइल पुलिस आयुक्त रमित शर्मा के न्यायालय में पहुंची तो उन्होंने मामला संज्ञान में लिया। इसके बाद पिछले साल नवंबर में नोटिस जारी कर माइकल को कोर्ट में तलब किया गया।
यह था पूरा मामला
मूलरूप से बिहार के कैमूर भभुआं, सिकरी निवासी माइकल के खिलाफ मारपीट, धमकी, जानलेवा हमला समेत 18 मु़कदमे दर्ज हैं। 2012 में छात्रनेता अभिषेक सिंह सोनू पर जानलेवा हमले के मामले में 10 साल की सजा भी सुनाई जा चुकी है। इस मुकदमे में वह जमानत पर था। छात्रसंघ चुनाव में अध्यक्ष पद के प्रत्याशी अभिषेक सिंह सोनू व महामंत्री पद पर चुनाव लड़ रहे माइकल के बीच होर्डिंग लगाने को लेकर हुए विवाद में उसने सरेआम गोलियां चलाई थीं। उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और जेल में रहते हुए ही उसने चुनाव जीता था।
माइकल समेत चार पर घोषित हुआ था इनाम
2019 में इविवि छात्रसंघ चुनाव के दौरान माइकल समेत चार आपराधिक छवि वाले छात्रनेताओं पर 25-25 हजार का इनाम घोषित किया गया था। इसमें माइकल के अलावा अभिषेक सिंह सोनू, सुमित शुक्ला, अजीत यादव व आकाश सिंह शामिल थे। इनमें से सुमित शुक्ला की पीसीबी हॉस्टल में गाेली मारकर हत्या की जा चुकी है।