इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रियल स्टेट कंपनी केखिलाफ सुनवाई करते हुए कहा कि जब अपीलीय अथॉरिटी केपास सुनवाई के अधिकार हैं तो सीधे हाईकोर्ट में याचिका दाखिल नहीं की जा सकती है। याची को पहले अपीलीय अथॉरिटी केपास सुनवाई के लिए जाना चाहिए। अपीलीय अथॉरिटी मामले में जब फैसला सुना दे, तब हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जा सकती है। यह फैसला दो जजों की खंडपीठ ने सुनाया।
राइस प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले में सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ ने कहा कि यूपी रियल स्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के पास रियल स्टेट एंड डेवलपमेंट एक्ट 2016 की धारा 43 (5) के तहत अपील पर सुनाई का अधिकार है तो अपीलीय अथॉरिटी को बाईपास करके सीधे हाईकोर्ट में अपील नहीं की जा सकती है। मामले में ग्रुप हाउसिंग कंपनी राइस प्रोजेक्ट लिमिटेड राम बिहार दिल्ली ने रेरा के आदेश को चुनौती दी है।
मामला यह था कि एक व्यक्ति ने राइस प्रोजेक्ट लिमिटेड कंपनी की आवासीय योजनाओं के अंतर्गत मकान खरीदने केलिए रकम जमा की थी, लेकिन समय सीमा बीतने के बाद कंपनी ने उसे कब्जा नहीं दिया। मकान खरीदार ने रियल स्टेट कंपनी केखिलाफ यूपी रेरा से शिकायत की। इस पर अथॉरिटी ने पूरी रकम के साथ एक फीसदी ब्याज के भुगतान के आदेश दिए।
लेकिन, कंपनी ने मामले में अपीलीय अथॉरिटी केसमक्ष अपील करने की बजाय सीधे हाईकोर्ट ने याचिका दाखिल कर दी। हाईकोर्ट ने मामले में याची कंपनी को अपीलीय अथॉरिटी केसमक्ष अपील करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि रेरा के नियमों के अंतर्गत याची को राहत पाने के लिए पहले अथॉरिटी केपास ही जाना चाहिए। अथॉरिटी को बाईपास करके सीधे हाईकोर्ट के समक्ष याचिका नहीं दाखिल करना चाहिए।