इलाहाबाद (वर्तमान में प्रयागराज) की नैनी जेल के निकट उनकी सभा रखी गई थी। इस सभा में नेहरू की एक झलक पाने के लिए लोग मीलों पैदल चलकर पहुंचे थे। नेहरू को देखकर वहां पहुंचे लोग बेकाबू हो गए। वे वीर जवाहर जिंदाबाद के नारे लगाने लगे।
पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की लोकप्रियता का आलम यह था कि लोग उन्हें देखने और सुनने के लिए मीलों पैदल चल कर आते थे। अमर उजाला के 20 जनवरी 1952 के अंक में प्रकाशित समाचार के अनुसार, उस समय नेहरू का अपने निर्वाचन क्षेत्र इलाहाबाद व जौनपुर का चुनावी दौरा था। इलाहाबाद (वर्तमान में प्रयागराज) की नैनी जेल के निकट उनकी सभा रखी गई थी। इस सभा में नेहरू की एक झलक पाने के लिए लोग मीलों पैदल चलकर पहुंचे थे।
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नेहरू को देखकर वहां पहुंचे लोग बेकाबू हो गए। वे वीर जवाहर जिंदाबाद के नारे लगाने लगे। लोगों ने उन्हें अपना मुक्तिदाता, राष्ट्रनायक और नए भारत की नाव का खेवैया कहकर पुकारा। वह खुली कार से सभा में पहुंचे। लोगों ने उन पर पुष्प वर्षा की। सभा में पहुंचीं महिलाएं कह रही थीं कि उनके जीवन की अंतिम इच्छा पूरी हो गई। नेहरू ने बच्चों को दुलारा। लोगों का अपने प्रति प्रेम देखकर नेहरू भी भावुक हो गए। जब नेहरू लोगों को संबोधित करने के लिए खड़े हुए तो वह भावनाओं पर काबू नहीं रख सके। गला रुंध गया और आंसू बह निकले। जनता उनको इतना प्रेम करती है, इसका अहसास पहली बार नेहरू को यहां आकर हुआ।