अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के विंग थिंक इंडिया की ओर से ‘वर्तमान में सुरक्षा की चुनौतियां और नेतृत्व’ विषय पर एमएनएनआईटी में रविवार को आयोजित गोष्ठी में वक्ताओं ने आंतरिक और वाह्य सुरक्षा के प्रति चिंता व्यक्त की। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल रिटायर जनरल विक्रम सिंह और मुख्य वक्ता पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने इन परिस्थितियों के लिए राजनीतिक अदूरदर्शिता को प्रमुख कारण बताया।
विक्रम सिंह ने कहा कि जम्मू कश्मीर के युवा भारतीय सेना का हिस्सा बनना चाहते हैं। इसका अनुमान पूर्व में हुई भर्तियों में लगी लंबी कतार से लगाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सेना के 54 पदों के लिए 25 हजार से अधिक कश्मीरी युवाओं ने आवेदन किया। इससे साफ है कि वहां के लोग अलगाववादियों को पसंद नहीं करते और भारतीय सेना पर उन्हें पूरा भरोसा है। उन्होंने आतंकवादी के खिलाफ लड़ाई के लिए बने विशेष कानून की भी वकालत की। विक्रम सिंह ने आंतरिक सुरक्षा के लिए भी सेना पर निर्भर होने के बजाय लोकल पुलिस को मजबूत करने की बात कही। पूर्व डीजीपी प्रकाश सिंह ने आंतरिक सुरक्षा के प्रति चिंता जाहिर की।
उन्होंने कहा कि हमने हर 10 साल में एक बड़ी समस्या को जन्म दिया। यह राजनीतिक अदूरदर्शिता का परिणाम है। प्रश्न प्रहर के दौरान उन्हाेंने पुलिस में सुधार की जरूरत बताई। ईमानदार अफसरों के बार-बार ट्रांसफर के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसके लिए अफसरों को आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने बताया कि दो साल से पहले किसी अफसर का ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है लेकिन अफसर ही ट्रांसफर का विरोध नहीं करते। दोनों अफसरों ने गोष्ठी में शामिल तकनीकी और प्रबंधन के छात्रों से देश के निर्माण में सहयोग की अपील की। गोष्ठी में आरएसएस के बीएल निगम, आशीष चौहान, डॉ.राजेंद्र, विवेक निगम, अजीव उपाध्याय, सनत मिश्रा आदि शामिल रहे।