अधिकारी ने आरोपों को बताया गलत
यात्रीकर अधिकारी रणवीर सिंह चौहान ने बताया कि रुपये गिनने वाला पुष्पेंद्र सिंह उनका रिश्तेदार है और सरकारी चालक नहीं होने के कारण उसे निजी चालक के तौर पर रखा गया है। उन्होंने वसूली के आरोपों को गलत बताया। अधिकारी के अनुसार, बस का 41 हजार रुपये का चालान किया गया था। इसमें 23 हजार रुपये ऑनलाइन और 18 हजार रुपये नकद जमा किए गए थे।
आरटीओ प्रवर्तन अधिकारी सत्येंद्र प्रकाश सिंह ने बताया कि सरकारी वाहन में यात्रीकर अधिकारी मौजूद थे और वह आगे की सीट पर बैठे थे। पीछे की सीट पर निजी चालक के बैठने और रुपये गिनने को लेकर पूछताछ की जा रही है।
बसों में मिलीं ये खामियां
ऑपरेशन के दौरान श्रद्धालुओं से भरी दो बसों में इमरजेंसी एग्जिट ब्लॉक, क्षमता से अधिक सीटें और बकाया टैक्स जैसी खामियां मिली थीं। इसके बाद दोनों बसों पर कार्रवाई की गई और उन्हें सीज करने की प्रक्रिया शुरू की गई। चालकों ने बस में श्रद्धालुओं के होने का हवाला देते हुए मौके पर जुर्माना जमा करने की मांग की थी।
आठ स्लीपर बसें सीज
अभियान के दूसरे दिन प्रयागराज से मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जाने वाली आठ स्लीपर बसों में निकासी द्वार ब्लॉक मिला। इसके बाद सभी आठ बसों को सीज कर दिया गया। क्षमता से अधिक यात्री बैठाने, बकाया टैक्स और अन्य खामियों के मामले में भी कार्रवाई की गई।