इसके पहले सुनवाई शुरू होते ही सरकारी की ओर से दलील शुरू की गई। कहा गया कि घटना के किसी भी गवाह से ऐसा कोई सुझाव नहीं लिया गया कि डकैतों ने हत्या की है। डकैती का कोई साक्ष्य पत्रावली पर नहीं है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में 1987 में तत्कालीन जिला क्षेत्र वाराणसी के बलुआ थानांतर्गत सिकरौरा कांड मामले में शुक्रवार को भी सुनवाई जारी रही। तकरीबन एक घंटे तक चली सुनवाई में अपर महाधिवक्ता पीसी श्रीवास्तव ने सरकार का पक्ष रखा। कहा कि बरी किए गए आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत हैं। ट्रायल कोर्ट का फैसला सही नहीं है। कोर्ट ने समयाभाव से सुनवाई को सोमवार तक के लिए टाल दिया।
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इसके पहले सुनवाई शुरू होते ही सरकारी की ओर से दलील शुरू की गई। कहा गया कि घटना के किसी भी गवाह से ऐसा कोई सुझाव नहीं लिया गया कि डकैतों ने हत्या की है। डकैती का कोई साक्ष्य पत्रावली पर नहीं है। इसलिए इसका सहारा नहीं लिया जा सकता है कि इस घटना को डकैतों ने अंजाम दिया है। इसके अलावा गवाहों का सीधा आरोप है। घटना स्थल से माफिया बृजेश सिंह खुद पकड़ा गया है। जांच अधिकारी के बयान में यह बात साफ आई है कि बृजेश सिंह को घटना स्थल से ही पकड़ा गया है। फिलहाल बहस पूरी न होने से कोर्ट ने सुनवाई को आगे के लिए टाल दिया।