किसी को अनावश्यक रूप से जेल में बंद नहीं रखा जा सकता
कोर्ट ने डीजीपी को उचित पारदर्शी व्यवस्था अपनाने के लिए सर्कुलर जारी करने का भी आदेश दिया था। सर्कुलर जारी भी किया गया है किन्तु पुलिस केस की पहले से नोटिस मिलने के बावजूद जानकारी उपलब्ध नहीं करा रही है। जिससे जमानत अर्जी सुनवाई में देरी होती है। कोर्ट ने कहा जमानत अर्जी समय से सुनी जाय, यह अभियुक्त का अधिकार है। अनुच्छेद 21के तहत जीवन स्वतंत्रता का मूल अधिकार है। किसी को भी अनावश्यक रूप से जेल में बंद नहीं रखा जा सकता।
शुरू में ही कोर्ट ने याची से आपराधिक इतिहास की जानकारी मांगी थी और पुलिस से भी जानकारी लेने का समय दिया था। किंतु पुलिस ने अभी तक जवाब नहीं दिया है। अपर महाधिवक्ता ने कहा सरकार कानून के शासन के लिए प्रतिबद्ध है।वह कोर्ट के आदेश का अक्षरश पालन करेगी।