नई दिल्ली से वाराणसी जा रही वंदे भारत एक्सप्रेस के गार्ड की तत्परता से एक यात्री की जान बच गई। सी-12 कोच की सीट नंबर 33 पर बैठे दिव्यांशु को सफर के दौरान दौरा पड़ गया। इस दौरान टॉकबैक के माध्यम से यात्रियों ने इसकी सूचना गार्ड प्रेम कुमार को दी। गार्ड ने बिना समय गंवाएं ट्रेन में एनाउंसमेंट कर चिकित्सकाें से इलाज की अपील की। ट्रेन के अलग-अलग कोच में सफर कर रहे छह डॉक्टर मौके पर पहुंचे। समय पर इलाज मिल जाने से यात्री की भी जान बच गई और उसने वाराणसी तक सफर पूरा किया।
नई दिल्ली से दिव्यांशु के साथ ट्रेन में दो अन्य लोग भी सफर कर रहे थे। सुबह दिल्ली से चलने के बाद दिव्यांशु की तबीयत बिगड़ने लगी। चर्चा है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। इससे वह बेहोश हो गए। उनके साथ में बैठे यात्रियों ने टॉकबैक के माध्यम से इसकी सूचना गार्ड प्रेम कुमार को दी। दरअसल वंदे भारत के हर एक कोच में टॉकबैक की सुविधा है। इसकी मदद से यात्री ट्रेन ड्राइवर एवं गार्ड से बातचीत कर सकते हैं।
सूचना मिलते ही गार्ड ने एनाउंसमेंट किया कि अगर ट्रेन में चिकित्सक सफर कर रहे हैं तो वे सी-12 कोच में पहुंचें। गार्ड की अपील काम कर गई। एक नहीं कुल छह चिकित्सक सी-12 कोच में पहुंचे गए। इस दौरान गार्ड भी फर्स्टएड बॉक्स लेकर वहां पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने दिव्यांशु का उपचार किया। इसके बाद वह होश में आए। बाद में दिव्यांशु ने वाराणसी तक सफर जारी रखा। उधर गार्ड और चिकित्सकों के लिए यात्रियों ने खूब तालियां भी बजाई। एनसीआर के सीपीआरओ अजीत कुमार सिंह ने कहा कि गार्ड की तत्परता से एक यात्री की जान बच गई।