प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घर के भीतर के जो हालात थे उससे यही लग रहा था कि वैद्य के बेटे व दोनों बेटियों को तो चारपाई से उठने का भी मौका नहीं मिला। हत्यारों ने सोते समय ही धारदार हथियार से वार कर उन्हें मौत की नींद सुला दिया। वैद्य के गले के अलावा शरीर के कई अन्य हिस्सों में भी जख्म के निशान मिलने से माना जा रहा है कि जान बचाने के लिए उन्होंने हत्यारों से जमकर संघर्ष किया। घर के भीतर काफी मात्रा में खून भी बिखरा था।