कई दिनों तक किया गया लाखों का हेरफेर
गौरतलब है कि मार्गपत्र वह दस्तावेज है जिसमें टिकटों की बिक्री का हिसाब-किताब खुद परिचालकों की ओर से दर्ज किया जाता है। आरोप है कि संदेह होने पर जब मार्गपत्रों की जांच अल्ट्रावायलेट रेज लैंप से की गई तो पता चला कि कुल छह संविदा परिचालकों की ओर से 30 तिथियों में मैजिक पेन का इस्तेमाल कर टिकटों की बिक्री के हिसाब-किताब में हेरफेर किया गया।
इनमें संविदा परिचालक विवेक कुमार यादव, विनय कुमार भारतीय, चंदन यादव, प्रवीण कुमार तिवारी, सुनील कुमार चौधरी और शुभम त्रिपाठी शामिल हैं। सिविल लाइंस पुलिस ने बताया कि तहरीर के आधार पर सभी के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। जांच-पड़ताल की जा रही है।
खत्म की जा चुकी है संविदा
तहरीर में यह भी बताया गया है कि उपरोक्त संविदा परिचालकों को सुनवाई का मौका दिया गया था। लेकिन इनकी ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया जा सका। जांच में दोषी पाए जाने पर इनकी प्रतिभूति जब्त करते हुए संविदा समाप्त करने की कार्रवाई की जा चुकी है। मामला सरकारी धन के गबन का है, ऐसे में एफआईआर दर्ज कराई गई है।