साक्ष्य सौंपने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय का कहना है कि हजारों छात्रों ने अपनी जान को जोखिम में डालकर सीबीआई के समक्ष बयान दर्ज कराए। उन्हें उम्मीद थी कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, लेकिन पांच वर्षों में कोई बड़ी कार्रवाई नहीं की गई। प्रतियोगी छात्र खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं। छात्रों की ओर से समिति मांग करती है कि सीबीआई अपनी स्टेटस रिपोर्ट उन छात्रों के समक्ष सार्वजनिक करें, जिन्होंने भर्तियों में धांधली के खिलाफ अपने बयान दर्ज कराए और सीबीआई को साक्ष्य भी सौंपे।
सीबीआई की धीमी जांच के मुद्दे पर कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय ने दोषियों पर कार्रवाई न होने के मामले में शासन स्तर के अफसरों पर भी निशाना साधा है। अवनीश का आरोप है कि शासन और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में बैठे कुछ अफसर जांच को लटकाने का प्रयास कर रहे हैं।
भर्तियों में धांधली के मामले में चिह्नित किए गए अफसरों के खिलाफ सीबीआई ने प्रदेश सरकार से अभियोजन की स्वीकृति मांगी थी, लेकिन संबंधित फाइल लंबे समय से शासन और आयोग में अटकी है। ऐसे में सीबीआई को अपनी स्टेटस रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि पता चल सके कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कहां और किसकी वजह से अटकी हुई है।