एपीएस भर्ती की जांच के लिए मिली थी विशेष अनुमति
सीबीआई आयोग की उन परीक्षाओं की जांच कर रही हैं, जिनके रिजल्ट अप्रैल 2012 से मार्च 2017 के बीच जारी किए गए थे। एपीएस भर्ती परीक्षा-2010 सीबीआई जांच के दायरे में नहीं आ रही थी। कुछ अभ्यर्थियों से मिले दस्तावेजों के आधार पर सीबीआई को जब प्राथमिक जांच में गड़बड़ी मिली तो सीबीआई ने शासन को पत्र भेजकर एपीएस भर्ती-2010 की जांच के लिए विशेष अनुमति मांगी थी। बाद में शासन से अनुमति मिलने पर सीबीआई ने आधिकारिक रूप से इसकी जांच शुरू की। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने इस परीक्षा की जांच के दौरान पूर्व परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ से भी कई बार पूछताछ की थी।
छह महीने पहले मांगी थी मुकदमा दर्ज कराने की अनुमति
सीबीआई ने आयोग की भर्ती परीक्षाओं में जांच के दौरान मिली गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोक सेवकों पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए दिसंबर 2020 में शासन को पत्र भेजकर अनुमति मांगी थी। तकरीबन छह माह तक अभियोजन स्वीकृति की फाइल शासन स्तर पर अटकी रही। सूत्रों का कहना है कि कुछ अफसर नहीं चाहते थे कि सीबीआई को मुकदमा दर्ज कराने की अनुमति मिले और इसी वजह से फाइल अटकी रही। अब अनुमति मिलने के बाद सीबीआई ने मुकदमा दर्ज किया है।
28 चयनितों की ज्वाइनिंग सरकार ने रोक रखी है
एपीएस-2010 के तहत 250 पदों पर भर्ती की गई थी। इनमें से 222 चयनित अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश सचिवालय में कार्यरत हैं, जबकि 22 चयनित अभ्यर्थियों की ज्वाइनिंग सरकार ने जांच पूरी होने तक रोक कर रखी है।
सीवीसी ने कार्रवाई के लिए सीबीआई को लिखा था पत्र
सीबीआई आयोग की भर्ती परीक्षाओं की जांच साढ़े तीन साल से कर रही है, लेकिन अब तक किसी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले में अभ्यर्थियों ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को पत्र लिखा था, जिसके बार सीवीसी ने मामले में कार्रवाई के लिए सीबीआई को पत्र लिखा था।
सीबीआई ने दर्ज की दूसरी एफआईआर
आयोग की परीक्षाओं में धांधली के मामले में सीबीआई ने दूसरी एफआईआर दर्ज की है। इससे पूर्व सीबीआई ने पीसीएस परीक्षा-2015 में धांधली के मामले में पांच मई 2018 को एफआईआर दर्ज की थी। यह मुकदमा आयोग के अज्ञात अफसरों और बाहरी अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज किया गया था। सीबीआई ने जांच में कुछ अभ्यर्थियों की कॉपियों पर विश्ेाष चिह्न लगा हुआ पाया था, जिससे उनकी पहचान की जा सकती थी। इसके साथ ही जांच में पाया था कि स्केलिंग और मॉडरेशन की आड़ में अंकों के साथ छेड़छाड़ की गई है। हालांकि मुकदमा दर्ज होने के बाद सीबीआई ने अब तक किसी के खिलाफ कोई सीधी कार्रवाई नहीं की है।