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गंगा-यमुना के जलस्तर में वृद्धि जारी, बस्ती में पानी भरने से लोगों का पलायन

Fri, 06 Aug 2021 10:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  • बाढ़ से पलायन, राहत शिविरों में ली शरण
  • छोटा बघाड़ा के एनी बेसेंट और अशोक नगर के कैंट हाईस्कूल में शिविर शुरू
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prayagraj news : बाढ़ से गंगा के कछारी इलाके की बस्ती में भरा पानी। - फोटो : prayagraj
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विस्तार
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बाढ़ की विभिषिका अपना असर दिखाने लगी है। निचले इलाके के सैकड़ों घर बाढ़ में डूब गए हैं और लोग अपनी पूरी गृहस्थी छोड़ने के लिए मजबूर होने लगे हैं।। इसकी वजह से शुक्रवार को दो राहत शिविर चालू कर दिए गए। रात आठ बजे तक इन शिविरों में 66 लोग पहुंच भी गए थे। 

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prayagraj news : बाढ़ से गंगा के कछारी इलाके की बस्ती में भरा पानी। - फोटो : prayagraj
चेतावनी बिंदु के करीब पहुंची गंगा-यमुना ने कछारी इलाके की दो दर्जन से अधिक बस्तियों को शुक्रवार को चपेट में ले लिया। बेली, चिल्ला और छोटा बघाड़ा कछार में सैकड़ों घरों में पानी घुस गया। प्रभावित पानी से घिरे दो मंजिला भवनों की छतों पर इससे प्रभावित परिवारों को घर छोड़ना पड़ा। नेवादा कछार में घर डूबने के बाद तीन दर्जन से अधिक लोगों ने छावनी क्षेत्र के ओल्ड कैंट हाईस्कूल के बाढ़ राहत शिविर में शरण ले ली। नदी की तलहटी में घर बनाने वाले लोग पानी से घिरने के बाद बर्तन, अनाज और बिस्तर लेकर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने लगे हैं। शुक्रवार की रात आठ बजे फाफामऊ में गंगा खतरे के निशान से 1.35 और नैनी में यमुना खतरे के निशान से 1.55 मीटर नीचे बहती रहीं।

prayagraj news : बाढ़ के चलते लोगों का पलायन शुरू हो गया है। - फोटो : prayagraj
बाढ़ग्रस्त इलाकों में राहत और बचाव के लिए प्रशासन ने मुनादी करानी शुरू कर दी है। ताकि समय रहते प्रभावित इलाके को खाली कराया जा सके और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। पिछले 24 घंटे में गंगा और यमुना के जलस्तर में डेढ़ मीटर से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है। इससे कछारी इलाकों में बाढ़ का दायरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। शाम तक सैकड़ों घरों में पानी भर गया। जिस रफ्तार से जलस्तर बढ़ रहा है, उससे वह शनिवार गंगा-यमुना के डेंजर जोन में पहुंचने की आशंका है।

prayagraj news : बाढ़ के चलते लोगों का पलायन शुरू हो गया है। - फोटो : prayagraj
हालात को देखते हुए देर शाम एनडीआरएफ लगा दी गई। साथ ही एसडीआरएफ के साथ ही पुलिस, पीएसी को भी सतर्क कर दिया गया। गंगा का जलस्तर बढ़ने से बेली कछार, गंगापुरी, नेवादा कछार, अशोक नगर कछार, दशाश्वमेध घाट, म्यौराबाद, जोंधवल, शंकरघाट,  बघाड़ा, सलोरी, राजापुर, ऊंचवागढ़ी, शिवकुटी, कैलाशपुरी कालोनी, चिल्ला कछार, नीवां, छतनाग, बदरा सोनौटी, हेतापट्टी, फाफामऊ समेत दो दर्जन से अधिक इलाकों में पानी घुस गया है। इसी प्रकार यमुना का जलस्तर बढ़ने से शहर से सटकर बहने वाली ससुर खदेरी नदी के तटवर्ती करेलाबाग, गौशनगर, सदियापुर मोहल्लों में पानी घुसने लगा है।

prayagraj news : बाढ़ के चलते लोगों का पलायन शुरू हो गया है। - फोटो : prayagraj
श्मशान घाट डूबे, अब अंतिम संस्कार में दिक्कतें
गंगा और यमुना के जलस्तर की रफ्तार से शनिवार शाम तक कई और इलाके जलमग्न हो जाएंगे। जलस्तर बढ़ने से दोनों नदियों के किनारे श्मशान घाट डूबने से अंतिम संस्कार में दिक्कतें आने लगी हैं। दारागंज घाट पर तो दाह संस्कार का कार्य ही प्रशासन ने रोक दिया है। छतनाग एवं फाफामऊ में शवों के अंतिम संस्कार में दिक्कतें पैदा हो गई हैं। यमुना में बाढ़ से अरैल, भीटा, सेमरी श्मशान घाटों पर भी अंतिम संस्कार प्रभावित होने लगा है। अंतिम संस्कार के लिए लाई गई लकड़ियों के स्टाल सड़कों पर लगा दिए गए हैं। अब सड़कों पर ही अंतिम संस्कार भी कराया जा रहा है।

सिक्सलेन पुल का कम बंद, मजदूरों ने स्टैनली रोड के पास ली शरण
फाफामऊ में गंगा के लाल निशान की ओर बढ़ने के बाद सिक्सलेन पुल का निर्माण रोक दिया गया। मेहंदौरी गांव के पास पुल निर्माण का काम चल रहा था। यहां लगे मजदूरों ने अब मोहक हास्पीटल के पीछे डेरा डाल दिए।

prayagraj news : बाढ़ से गंगा के कछारी इलाके की बस्ती में भरा पानी। - फोटो : prayagraj
गंगा-यमुना का जलस्तर
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खतरे का निशान: 84.73 मीटर

चेतावनी बिंदु: 83.73 मीटर

गंगा
फाफामऊ- 83.38 मीटर

छतनाग- 82.64 मीटर

यमुना
नैनी-83.18 मीटर


बाढ़ से निबटने के इंतजाम

बाढ़ कंट्रोल रूम नंबर: 0532-2641577, 2641578

बाढ़ नियंत्रण प्रभारी उपजिलाधिकारी सदर: 9454417814

-20 सरकारी और 15 प्राइवेट गोताखोरों की बाढ़ प्रभावित इलाकों में तैनाती

-110 बाढ़ शरणालय बनाए गए

-98 बाढ़ चौकियां स्थापित 

prayagraj news : बाढ़ से गंगा के कछारी इलाके की बस्ती में भरा पानी। - फोटो : prayagraj
2000 नाव और 05 प्राइवेट मोटरबोट हैं उपलब्ध
एनी बेसेंट स्कूल में तीन परिवार के 11 लोग पहुंच गए हैं। वहीं कैंट हाईस्कूल में रात आठ बजे तक 55 लोग पहुंच गए थे। इनके अलावा बदरा सोनौटी में नावें चलाई जा रही हैं। एसडीएम सदर विवेक चतुर्वेदी ने बताया कि दोनों शिविर में भोजन आदि के इंतजाम कर दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर राहत शिविरों की संख्या बढ़ाई जाएगी।

prayagraj news : बाढ़ से गंगा के कछारी इलाके की बस्ती में भरा पानी। - फोटो : prayagraj
मंडलायुक्त, डीएम ने किया निरीक्षण
मंडलायुक्त संजय गोयल और डीएम संजय कुमार खत्री ने शुक्रवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। बघाड़ा, दारागंज समेत अन्य स्थानों पर पहुंचे अफसरों ने बाढ़ से निपटे की तैयारियों का भी जायजा लिया। उन्होंने संबंधित विभाग के अफसरों को हर जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दिए। इस दौरान एडीमए वित्त एवं राजस्व एमपी सिंह, अधीक्षक अभियंता बाढ़ कार्य खंड सिद्धार्थ कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।

prayagraj news : बाढ़ से गंगा के कछारी इलाके की बस्ती में भरा पानी। - फोटो : prayagraj
गंगा, यमुना के जलस्तर बढ़ने से हजारों एकड़ फसल जलमग्न
गंगा और यमुना के जलस्तर में लगातार वृद्धि होने से जिले में हजारों एकड़ फसल जलमग्न हो गई है। दर्जनों की संख्या में सिंचाई के लिए नलकूप डूब गए हैं। इससे खरीफ की फसलों के उत्पादन पर बड़ा असर पड़ सकता है। जलस्तर और बढ़ा यह संकट और गहराएगा। पानी के तीन से चार दिनों तक खेतों में लगे रहने से धान, अरहर, तिल, उड़द, बाजरा, ज्वार सहित दलहन, तिलहन वाली फसल बुरी तरह से प्रभावित हो सकती है। 

prayagraj news : बाढ़ से गंगा के कछारी इलाके की बस्ती में भरा पानी। - फोटो : prayagraj
गंगा और यमुना के कछारी इलाकों के निवासियों के मुताबिक तीन दिनों में जलस्तर में वृद्धि होने से दोनों नदियों का कछारी इलाका जलमग्न हुआ है। इधर श्रृंगवेरपुर से लेकर कौड़िहार से होते हुए फाफामऊ, थरवई, सोनौटी, बदरा, झूंसी नैनी, कोटवां, बेलवार, कतवारीपुर, सिरसा, हंडिया सहित आसपास के कछारी इलाके जलमग्न हो गए हैं। इन इलाकों में किसानों ने हजारों एकड़ भूमि पर दलहन और तिलहन की फसलों की बुआई करने के साथ धान की रोपाई की है। धान की रोपाई का क्षेत्रफल अधिक है।
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फाफामऊ के पूर्व के इलाके के मुकाबले छतनाग से बनारस की तरफ का कछारी इलाका अधिक प्रभावित हुआ है। कछारी इलाकों में सिंचाई के लिए लगाए गए दर्जनों की संख्या में नलकूप भी डूब गए हैं। कतवारीपुर के अनुराग तिवारी ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ने से उनके गांव के ओम प्रकाश और राजाराम तिवारी की बोरिंग डूब गई है। उन्होंने बताया कि जलस्तर में बढ़ोत्तरी इतनी जल्दी होगी। इसकी उम्मीद नहीं थी। इसी तरह का हाल दूसरे इलाकों में भी है। कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक दोनों नदियों का जलस्तर बढ़ने से बड़े इलाके में फसलें प्रभावित हुई हैं। इसका आंकलन किया जा रहा है।
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