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यूपीपीएससी : दूसरे दिन भी आयोग में सीबीआई, खंगाले दस्तावेज

Thu, 31 Mar 2022 07:42 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

सीबीआई को समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) परीक्षा-2013, लोअर सबऑर्डिनेट परीक्षा-2013 और पीसीएस जे परीक्षा-2013 में गड़बड़ी के सुराग मिले हैं। इन तीनों परीक्षाओं को लेकर सीबीआई की ओर से प्राथमिक जांच (पीई) भी दर्ज की जा चुकी है।
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UPPSC - फोटो : Social media
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विस्तार
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सीबीआई जांच की धीमी गति हाईकोर्ट की ओर से स्टेटस रिपोर्ट तलब किए जाने के बाद जांच एजेंसी अचानक सक्रिय हो गई है। लगातार दूसरे दिन सीबीआई की टीम उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में पहुंची और वहां दस्तावेज खंगाले। सीबीआई को वर्ष 2013 की तीन परीक्षाओं में गड़बड़ी के सुराग मिल हैं, जिनसे संबंधित दस्तावेज आयोग में खंगाले जा रहे हैं। सीबीआई की ओर से स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल किए जाने के बाद स्थिति काफी कुछ साफ होने की उम्मीद है।

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सूत्रों का कहना है कि सीबीआई को समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) परीक्षा-2013, लोअर सबऑर्डिनेट परीक्षा-2013 और पीसीएस जे परीक्षा-2013 में गड़बड़ी के सुराग मिले हैं। इन तीनों परीक्षाओं को लेकर सीबीआई की ओर से प्राथमिक जांच (पीई) भी दर्ज की जा चुकी है। वहीं, पीसीएस-2015 और अपर निजी सचिव (एपीएस)-2010 में मिले धांधली के सबूतों के आधार पर एफआईआर दर्ज हो चुकी है।



हालांकि इनमें से किसी भी मामले में सीबीआई ने अब तक किसी के खिलाफ कोई सीधी कार्रवाई नहीं की है। एपीएस-2010 के मामले में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक प्रभुनाथ को नामजद किया गया है, लेकिन वह सीधे ने पूर्व परीक्षा नियंत्रक पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

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सभी को सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट का इंतजार
एपीएस-2010 के मामले में सीबीआई ने शासन और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को पत्र भेजकर अभियोजन स्वीकृति की अनुमति मांगी थी, लेकिन सीबीआई का पत्र अब तक शासन और आयोग में ही अटका है। दरअसल, लोकसेवकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सीबीआई को अभियोजन स्वीकृति लेनी पड़ती है।



सूत्रों मुताबिक शासन स्तर के कुछ अफसर अभियोजन स्वीकृति की फाइल को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं, जिसकी वजह से एपीएस-2010 में धांधली के लिए जिम्मेदार लोग सीबीआई की पकड़ से बाहर हैं। अब सभी को सीबीआई की स्टेटस रिपोर्ट का इंतजार है, जो एक सप्ताह के भीतर कोर्ट में दाखिल होनी है। स्टेटस रिपोर्ट आने के बाद काफी कुछ स्पष्ट हो जाएगा कि सीबीआई की जांच कहां तक पहुंची है। 


वहीं, प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि सीबीआई जांच को पांच साल होने जा रहे हैं। अब तक हजारों अभ्यर्थियों के बयान दर्ज किए गए, कई परीक्षाओं  में गड़बड़ी के सुराग मिलने पर मुकदमे भी दर्ज किए गए, लेकिन कोई सीधी कार्रवाई न होने के कारण जांच से अब भरोसा उठने लगा है। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय ने समिति की मांगों को दोहराते हुए कहा है कि सीबीआई को तत्काल अभियोजन स्वीकृति दी जाए और जांच में तेजी लाने के लिए एसआईटी का गठन किया जाए।
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