छात्रों का आरोप, जानबूझकर की जा रही देरी
कोर्ट की सख्ती के बाद आयोग ने पीसीएस-2019 और पीसीएस-2020 की संशोधित उत्तरकुंजी एक साथ जारी कर दी और इसके बाद स्पष्ट हुआ कि पीसीएस की दोनों परीक्षाओं में 38 सवाल गलत थे, जिनमें से कई को डिलीट किया गया और कुछ को संशोधित किया गया। आयोग ने दोनों उत्तरकुंजी तब जारी की, जब चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति मिल चुकी थी। सूत्रों का कहना है कि आयोग ने अपने पुराने प्रस्ताव में बदलाव करते हुए अंतिम चयन परिणाम के बाद उत्तरकुंजी देने का निर्णय ले लिया।
अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए हैं कि परीक्षाओं में पारदर्शिता का दावा करने वाले आयोग को यह बदलाव करने की जरूरत क्यों पड़ी? अगर आयोग के विशेषज्ञ त्रुटिरहित प्रश्नपत्र तैयार करें और सही सवाल पूछे जाएं तो अभ्यर्थी कोर्ट क्यों जाएंगे? प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय का आरोप है कि आयोग जानबूझकर देर से उत्तरुकुंजी जारी कर रहा है, ताकि गलत सवाल पर अभ्यर्थी मजबूती के साथ दावा न कर सकें और प्रश्नों को लेकर कोई विवाद होने से पहले नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर ली जाए।