इनमें दिव्यांगजन, महिलाओं, वृद्धजनों के अधिकारों से जुड़े अधिनियम आदि शामिल थे। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने इन अधिनियमों की तैयारी ठीक से की थी, लेकिन इनसे केवल 12 सवाल ही पूछे गए। प्रतियोगी परीक्षाओं के विशेषज्ञ पवन तिवारी का कहना है कि आयोग का यह कदम स्वागतयोग्य है कि परीक्षा की प्रकृति को ध्यान में रखते हुए सामान्य अध्ययन के पेपर में नौ अधिनियमों को शामिल किया गया, लेकिन पेपर में इन अधिनियमों से जुड़े प्रश्नों की संख्या काफी कम है।
परीक्षा में 150 सवाल पूछे गए थे, जिनमें से केवल 12 प्रश्न ही नौ अधिनियमों से जुड़े हैं। इन सवालों की संख्या अधिक होनी चाहिए थी। विशेषज्ञों के अनुसार दूसरी पाली में हुई विधि की परीक्षा में अवधारणात्मक सवाल कम पूछे गए। ज्यादातर सवाल सेक्शन आधारित थे। ऐसे में जिन अभ्यर्थियों ने रटकर पढ़ाई की होगी, उन्हें दिक्कत नहीं होगी। मिलान करने वाले सवालों की संख्या भी अधिक थी। विशेषज्ञों के मुताबिक अवधारणात्मक सवालों की संख्या अधिक होनी चाहिए थी, ताकि अभ्यर्थी के ज्ञान का सही परीक्षण हो सके।
प्रयागराज में 67.42 फीसदी रही उपस्थिति
पीसीएस जे प्रारंभिक परीक्षा के लिए प्रयागराज में 15357 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। पहली पाली की परीक्षा में 10430 परीक्षार्थी उपस्थित रहे। वहीं, दूसरी पाली की परीक्षा में इनमें से 10354 अभ्यर्थी (67.42 फीसदी) उपस्थित रहे। यानी पहली पाली की परीक्षा देने के बाद 76 अभ्यिर्थियों ने दूसरी पाली की परीक्षा छोड़ दी। वहीं, आगरा में सबसे कम 52.26 फीसदी उपस्थिति रही। गोरखपुर में 67.29 फीसदी, कानपुर में 66.45 फीसदी और मेरठ में 67.31 फीसदी उपस्थिति रही।