कुछ योग्य अभर्थियों के मॉडरेशन के नाम पर घटा दिए थे 20 अंक
मॉडरेशन मुख्य परीक्षा के अनिवार्य विषयों में होता है। पीसीएस-2015 में अनिवार्य विषय सामान्य हिंदी में मॉडरेशन के नाम पर कुछ योग्य अभ्यर्थियों के 20 नंबर तक घटा दिए और कुछ अभ्यर्थियों के 28 नंबर तक बढ़ाकर उनका चयन कराया गया। इसी तरह दूसरे अनिवार्य विषय निबंध के पेपर की कॉपियों में 15 नंबर तक घटाए और कुछ अभ्यर्थियों को अधिकतम 21 नंबर तक का फायदा पहुंचाया गया। सीबीआई की एफआईआर में कहा गया था कि इस तरह से किया गया मॉडरेशन पूरी तरह से गैरजिम्मेदाराना और फ्रॉड है।
सीबीआई ने आयोग के जिन अज्ञात अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था, उन अफसर पर टिप्पणी की गई थी कि उन्होंने अपने पद का गलत तरीके से इस्तेमाल किया। यह आपराधिक षड़यंत्र और धोखाधड़ी का मामला है। साथ ही सीबीआई की ओर से दर्ज एफआईआर में कहा गया था कि आयोग ने मॉडरेशन के मामले में ‘संजय सिंह बनाम यूपीपीएससी’ पर सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का उल्लंघन किया और अभ्यर्थियों को मनमाने तरीके से नंबर दिए।
कई अभ्यर्थियों के कॉपियों में बने थे विशेष चिन्ह
सिर्फ यही नहीं, सीबीआई ने पीसीएस-2015 की कॉपियों की जांच के दौरान एक गंभीर और मामला पकड़ा था। कई अभ्यर्थियों की कॉपियों पर विशेष प्रकार के चिह्न बने हुए मिले थे, जिन्हें डीकोड कर अभ्यर्थियों की पहचान आसानी से की जा सकती थी। खास यह कि आयोग के परीक्षकों ने भी इस पर कोई आपत्ति नहीं की और न ही अफसरों ने इस पर कोई ध्यान दिया। अभ्यर्थियों की यह कारगुजारी साफ इशारा कर रही थी कि आयोग के कुछ अफसरों, परीक्षकों और अभ्यर्थियों के बीच मिलीभगत थी।
इन तमाम मामलों में सीबीआई ने आयोग के अज्ञात अफसरों और कुछ बाहरी अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन इन अज्ञात अफसराें को न तो अब तक चिह्नित किया गया और न ही कोई आरोपी पकड़ा जा सका। प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय का कहना है कि दस हजार अभ्यर्थियों ने अपनी जान को जोखिम में डालकर सीबीआई में बयान दर्ज कराया, लेकिन पांच साल बाद भी कोई गिरफ्तारी न होने अभ्यर्थियों का जांच से भरोसा उठ गया है।