इलाहाबाद हाईकोर्ट ने याचिका में झूठे बयान दर्ज करने पर जौनपुर जलनिगम से सेवानिवृत्त कर्मचारी को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने पूछा है कि झूठी गवाही के लिए क्यों न उसके खिलाफ मुकदमा चलाया जाए। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए 11 जुलाई की तिथि तय की है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने राजनाथ सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
कोर्ट ने कहा कि याची का आचरण उचित नहीं प्रतीत हो रहा है। क्योंकि सेवानिवृत्त के बाद याची को देयों का भुगतान कर दिया गया है। उसके बावजूद याची की ओर से कहा गया कि याचिका को दायर करने तक कुछ भी भुगतान नहीं किया गया है। यह रिट याचिका में किए गए झूठे दावे के बराबर है। याची ने याचिका में पूरे सेवानिवृत्ति बकाया जैसे ग्रेच्युटी, पेंशन और नकदीकरण, एसीपी आदि के बकाया ब्याज सहित भुगतान की मांग की थी।
प्रतिवादी की ओर से अंतिम तिथि को एक हलफनामा दायर कर बताया गया कि याची को सेवानिवृत्ति बकाया की पूरी बकाया राशि का भुगतान किया गया है। याची के अधिवक्ता से इस संबंध में जानकारी भी मांगी गई। याची के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि याची को को पहले ही सेवानिवृत्ति का बकाया मिल चुका है।
प्रतिवादी अधिवक्ता प्रांजल मेहरोत्रा ने इसका एक दस्तावेज (चेक) भी कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया। जिसमें छह जून 2012 को 13,308 रुपये की समूह बीमा राशि का भुगतान भी किया गया था। जिसकी प्रति याचिकाकर्ता को भी उपलब्ध करा दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि दस्तावेजों से पता चलता है कि याचिकाकर्ता को 31 जनवरी 2011 को उसकी सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद पूरे बकाए का भुगतान कर दिया गया था।