उन्होंने बताया कि खुशी पाठ्यक्रम कक्षा एक से आठ तक के बच्चों पढ़ाया जाएगा। इससे वे खुद से, अपने परिवार, समाज, प्रकृति और देश से जुड़ाव महसूस कर सकेंगे। इससे उन्हें अंतरसंबंध समझने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि छात्रों को ध्यान भी सिखाया जाएगा।
वर्कशॉप में ट्रेनर के तौर पर जुड़े श्रवण शुक्ला ने कहा कि अप्रैल 2022 से शुरू हो रहे अगले सत्र में खुशी पाठ्यक्रम लागू करने के हिसाब से तैयारियां हो रही हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल में 1.30 लाख प्राइमरी स्कूल हैं, जिनमें सात लाख शिक्षक पढ़ाते हैं।