प्रमोद के बहाने कांग्रेस की पटेलों को साधने की कोशिश
सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे दिग्गज नेता जंग बहादुर पटेल के बेटे प्रमोद सिंह पटेल को पार्टी में शामिल कराके कांग्रेस ने पटेल मतदाताओं के ध्रुवीकरण की लड़ाई और तेज कर दी है। इससे सपा को झटका तो लगा ही है, गठबंधन के भविष्य तथा फूलपुर लोकसभा सीट की दावेदारी को लेकर भी अटकलों का दौर तेज हो गया है। फूलपुर लोकसभा तथा आसपास के क्षेत्रों में पटेल मतदाताओं की प्रभावी भागीदारी है। इसका अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि फूलपुर से जंगबहादुर पटेल दो बार सांसद रह चुके हैं। इनके अलावा रामपूजन पटेल, धर्मराज पटेल, नागेंद्र पटेल भी सांसद रहे। वर्तमान में यहां से केशरी देवी पटेल सांसद हैं।
ऐसे में कांग्रेस ने अपने समय के दिग्गज नेता रहे जंग बहादुर पटेल के पुत्र प्रमोद सिंह पटेल को पार्टी में शामिल कराके इस वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश की है। इतना ही नहीं कांग्रेस ने प्रयागराज के ही राम किशुन पटेल का पार्टी में कद बढ़ाते हुए उन्हें प्रदेश सचिव से महासचिव बना दिया है। इसकी घोषणा भी शनिवार को की गई।
प्रमोद 2014 में प्रतापगढ़ से थे कांग्रेस के लोकसभा उम्मीदवार
प्रमोद पटेल ने 2014 का लोकसभा चुनाव सपा के टिकट पर प्रतापगढ़ लोकसभा से लड़ा था। उस चुनाव में वह चौथे स्थान पर रहे। हालांकि उन्हें एक लाख 20 हजार से अधिक वोट मिले थे। अब प्रमोद पटेल के कांग्रेस में आने के बाद उन्हें फूलपुर लोकसभा सीट से जंग बहादुर पटेल के वारिस के रूप में भी देखा जा रहा है। हालांकि, यह सपा की परंपरागत सीट मानी जाती है। ऐसे में प्रमोद को अपने साथ लाकर कांग्रेस ने सपा को दोहरा झटका दिया है।
हालांकि, प्रमोद पटेल के लिए भी फूलपुर लोकसभा सीट से दावेदारी की राह आसान नहीं दिख रही है। लोकसभा चुनाव में गठबंधन हुआ तो सपा यह सीट नहीं छोड़ना चाहेगी। इसके अलावा कांग्रेस में भी कई नेताओं ने इस सीट से टिकट के लिए नजर गड़ा रखी है। इसका अनुमान इससे ही लगाया जा सकता है कि पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार इस बार पार्टी कैडर के नेताओं को टिकट देगी। बाहर से आए किसी नेता को टिकट नहीं मिलेगा।
प्रमोद पटेल का भी कहना है कि उन्होंने फूलपुर से दावेदार के रूप में पार्टी ज्वाइन नहीं की है। एक कार्यकर्ता के तौर पर वह कांग्रेस में शामिल हुए हैं। उनका कहना है कि मुलायम सिंह यादव के साथ पारिवारिक संबंध थे लेकिन अखिलेश यादव चाटुकारों से घिर गए हैं, पुराने नेताओं की उनकी नजर में कोई जगह नहीं है। वहीं, राहुल गांधी वंचित, युवाओं, किसानों की लड़ाई को आगे बढ़ा रहे हैं। इसलिए वह कांग्रेस में शामिल हुए हैं और एक कार्यकर्ता के तौर पर पार्टी को मजबूत करने की पूरी कोशिश करेंगे।