फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इलाहाबाद विवि प्रोफेसर पर कार्रवाई से पहले विश्वविद्यालय प्रशासन लेगा विधिक सलाह

Thu, 23 Apr 2020 01:18 AM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
विज्ञापन
Prayagraj News: Arrested Allahabad University Prof. Mohammed Shahid - फोटो : prayagraj
विज्ञापन
 पुलिस प्रशासन ने इविवि में राजनीति विज्ञान के प्रो. मोहम्मद शाहिद की गिरफ्तारी से पहले उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे की सूचना इविवि प्रशासन को दी थी, लेकिन प्रोफेसर की गिरफ्तारी के बाद इविवि प्रशासन को अधिकृत तौर पर कोई सूचना नहीं मिली है। सूचना मिलने के बाद इविवि प्रशासन मामले में विधिक सलाह लेगा और इसी आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाएगा।
विज्ञापन

इलाहाबाद विश्वविद्यालय
मरकज से लौटने की बात छिपाने पर पुलिस ने मंगलवार को इविवि के प्रो. मोहम्मद शाहिद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। प्रोफेसर की गिरफ्तारी से एक दिन पहले यानी सोमवार को इविवि प्रशासन को पुलिस की ओर से जारी एक पत्र मिला था, जिसमें कहा गया था कि प्रोफेसर के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है और यह संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे में प्रोफेसर को किसी भी वक्त गिरफ्तार जेल भेजा जा सकता है। प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए इविवि प्रशासन को मिली यह सूचना काफी नहीं थी, सो इविवि प्रशासन को प्रोफेसर की गिरफ्तारी के बाद की अधिकृत सूचना मिलने का इंतजार है। 

Allahabad University
सूत्रों के मुताबिक इविवि के अफसरों ने इस मसले पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है कि जिस अपराध में प्रोफेसर की गिरफ्तारी हुई है, उस तरह के मामलों में किस प्रकार की कार्रवाई होनी चाहिए। प्रोफेसर के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के लिए कार्य परिषद की मंजूरी आवश्यक है या फिर कार्य परिषद की ओर से सीधे कुलपति कार्रवाई का निर्णय ले सकते हैं और बाद में इसे कार्य परिषद में रिपोर्ट किया जा सकता है। हालांकि, इविवि प्रशासन किसी भी तरह की कार्रवाई से पहले विधिक सलाह लेना चाहता है। 
विज्ञापन

allahabad university
इविवि के पीआरओ डॉ. शैलेंद्र कुमार मिश्र का कहना है कि पुलिस की ओर से जो पत्र आया था, उसमें प्रोफेसर के खिलाफ दर्ज मुकदमे का उल्लेख था और उनकी गिरफ्तारी की आशंका जताई गई थी। प्रोफेसर की गिरफ्तारी की अधिकृत सूचना अब तक नहीं मिली है। चौबीस घंटे तक इंतजार किया जाएगा। इसके बाद अखबारों में प्रकाशित खबरों को संज्ञान में लेकर पुलिस प्रशासन को पत्र लिखकर अधिकृत तौर पर जानकारी मांगी जाएगी। सूचना आने के बाद मामले में विधिक सलाह ली जाएगी और इसी आधार पर कार्रवाई को लेकर कोई निर्णय लिया जाएगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें