जाना चाहते थे फॉरेंसिक विभाग में
चीर-फाड़ देखकर या बदबू से मन नहीं ऊबता? रोहित बताते हैं कि वह फॉरेंसिक विभाग में नौकरी चाहते थे। यह नहीं मिली। पर, सिविल पुलिस की इस तैनाती से सपना पूरा हो गया। अब तो अनुभव भी इतना हो गया है कि पोस्टमार्टम करने आए नए डॉक्टरों को बारीकियां बता देते हैं। 2017 में हुई डॉ. एके बंसल की हत्या, 2021 में महंत नरेंद्र गिरि की मौत अथवा 2023 में अतीक-अशरफ की हत्या...पोस्टमार्टम से पहले शवों की वीडियोग्राफी इन्होंने ही की है।
क्यों जरूरी है वीडियोग्राफी
वीडियोग्राफी हर शव की नहीं होती। इसके लिए जिलाधिकारी की अनुमति अनिवार्य है। यह वीडियोग्राफी उन्हीं मामलों में होती है, जब मौत का कारण स्पष्ट न हो या फिर चोट आदि को लेकर कोई विवाद हो अथवा कोई बड़ा घटनाक्रम हुआ हो, जिसे लेकर भविष्य में कोई सवाल खड़ा होने की आशंका दिखती हो। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशु पांडेय का कहना है कि वीडियोग्राफी सुबूत के लिए होती है, ताकि कानूनी दांवपेच फंसने पर उसे प्रस्तुत किया जा सके। काम में पारदर्शिता बनी रहे।