शैव अखाड़ों के बाद सोमवार को निराली शान के साथ बैरागियों ने कुंभ मेले की छावनी में डेरा डाला। जय हनुमान और जयश्री राम के जयकारों के बीच आराध्य ‘हनुमान जी’ की अगुवाई में तीनों अनी अखाड़ों पंच निर्वाणी अनी अखाड़ा, पंच निर्मोही अनी अखाड़ा, पंच दिगंबर अनी अखाड़े की शाही पेशवाई निकली।
हनुमान जी के निशान वाले ध्वजों और उनके विशाल आकर्षक विग्रह के साथ तीनों अनी अखाड़ों की पेशवाई केपी कॉलेज मैदान से आरंभ हुई। पेशवाई सीएमपी डॉट पुल को पार करते हुए बैरहना सब्जी मंडी होकर अलोपीबाग पहुंची। यहां से अलोपशंकरी मंदिर, दारागंज स्थित निर्वाणी अनी अखाड़ा के नए ठौर गंगा भवन के सामने पहुंचने पर संतों का स्वागत किया गया। हाथी, घोड़ों के अतिरिक्त फूलों से सुसज्जित रथों पर खालसों के श्रीमहंत विराजमान रहे।
अनी अखाड़ों की पेशवाई मोरी गेट होते हुए पंच निर्मोही अनी अखाड़े के करीब से शास्त्री पुल के नीचे से होकर काली मार्गस, त्रिवेणी मार्ग, पांटून पुल होते हुए पंच निर्मोही अनी अखाड़े के बगल स्थित सीधे चतु:संप्रदाय में पहुंचकर पूरी हुई। यहां संतों का जयकारों और माल्यार्पण के बीच भव्य रूप से स्वागत किया गया। यहां से तीनों अनी अखाड़ों के श्रीमहंत, खालसों के महंत, साधु अपने-अपने अखाड़ों की छावनी में पहुंचे।
ध्वज और निशान के संग वैष्णव अखाड़ों के जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हंसदेवाचार्य जी महाराज सबसे आगे चले। पंचनिर्वाणी अनी अखाड़े में श्रीमहंत धर्मदास, श्रीमहंत मोहन दास, पंचनिर्मोही अनी में श्रीमहंत राजेंद्र दास, श्रीमहंत रामजी दास और पंचदिगंबर अनी में श्रीमहंत कृष्ण दास, श्रीमहंत रामकिशोर दास आदि ने अपने-अपने अखाड़ों के संतों का नेतृत्व किया। पेशवाई में निर्वाणी अनी के सचिव महंत गौरीशंकर दास, निर्मोही अनी के सचिव महंत नरेंद्र दास, दिगंबर अनी के सचिव शिवशकंर दास, महंत गोपाल दास आदि के अतिरिक्त तकरीबन साढ़े सात सौ खालसों के संत-महात्मा, श्रद्धालु शामिल हुए।
पेशवाई में तेरहभाई त्यागी के श्रीमहंत रामकिशोर दास, अयोध्या खाक चौक श्रीमहंत सीतारामदास, श्री याज्ञवल्क्य खासला श्रीमहंत रामदास, रामदास नगर पंजाब के श्रीमहंत श्रीजी महाराज, अवध बिहारी नगर के श्रीमहंत अवध बिहारी दास, त्यागी भक्तमाल नगर केश्रीमहंत ओंकार दास, कामधेनु खासला के श्रीमहंत
रामचरण दास, चित्रकूट भक्त माल शिविर के श्रीमहंत विजयराम दास, खाकी अखाड़े के श्रीमहंत मोहनदास जी महाराज, पेटलाद नगर खालसा के श्रीमहंत वासुदेवदास जी आदि शामिल थे।
बैरागियों के अनी अखाड़ों की पेशवाई अपेक्षाकृत सादगी किंतु पूरी भव्यता के साथ निकली। परंपरा के मुताबिक त्रिवेणी मार्ग पर पहुंचने पर कुंभ मेला अधिकारी विजय किरन आनंद, डीआईजी कविंद्र प्रताप सिंह सहित प्रशासन एवं पुलिस के अन्य अधिकारियों ने माल्पार्यण करके संतों, श्रीमहंतों का स्वागत किया। इसी क्र म में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि के अतिरिक्त अन्य अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने भी अनी अखाड़ों के श्रीमहंतों, संतों को माल्यार्पण किया।
दारागंज सहित पेशवाई के पूरे रास्ते शहरियों, श्रद्धालुओं, तीर्थपुरोहितों ने भी संतों पर फूल बरसाए। साथ ही जयश्रीराम, जय हनुमान के जयकारे लगाए। सभी संतों की एक झलक पाने को आतुर रहे। पेशवाई के दौरान शहरियों की ओर चाय, फल, जलपान आदि की भी व्यवस्था की गई थी।
अनी अखाड़ों की पेशवाई में परंपरा और मर्यादा के अनुसार वस्त्रधारी नागा और खालसों के संत शामिल हुए। इस दौरान नागाओं की ओर से तलवारबाजी, फरसा, चक्र, चरखी आदि के ऐसे करतब दिखाए गए कि लोग चकित रह गए। विभिन्न कलाओं का प्रदर्शन लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना।