वह उमेश की भजीती थी। गली के मोड़ पर गोली लगने से लहूलुहान चाचा को देख वह चीखती रही। उसी दौरान पीछे से आए गुलाम ने गली के मोड़ पर जब उमेश पर गोली चलाई, तब उसने हिम्मत कर गुलाम से गुत्थमगुत्था शुरू कर दी और भतीजी को कहा कि बिटिया तुम घर में भाग जाओ। उसी समय पीछे से दौड़कर आए असद ने उमेश की गर्दन पर गोली मार दी। इसके बाद भी वह भागकर कमरे की ओर गया, लेकिन तबतक गुड्डू मुस्लिम ने गली में बम मार दिया ता। इससे कई छर्रे उमेश और सुरक्षाकर्मी को लगे थे।
उमेश के भतीजे दिव्यांश ने बताया कि उस्मान, गुलाम और असद की गोलियां लगने के बाद भी चाचा बच सकते थे, लेकिन गली में फेंके गए बम ने उनकी जान ले ली। दिव्यांश की मानें तो गोली -बम की आवाज सुनकर घर के लोग दौड़े थे। चाची जया पाल भी छत से वह दृश्य देखकर दौड़ीं लेकिन, किसी का बस नहीं चल सका। हम लोग पहुंचे, तबतक शूटर भाग चुके थे।