पुलिस ने कोर्ट में आरोप लगाया है कि उम्र कैद की सजा काट रहा सौलत हनीफ न सिर्फ अपराधियों का साथी बना, बल्कि अधिवक्ता पेशे की मर्यादा को भी लांघ गया। अधिवक्ता की भूमिका अपने मुवक्किल को कानूनी सलाह या अदालत में उसके मुकदमों की पैरवी करने की ही होती है, लेकिन हनीफ इससे इतर जाते हुए अपराध में खुद शामिल हुआ।
पुलिस ने आरोप लगाया है कि सौलत हनीफ ने अपने मोबाइल फोन से उमेश पाल की कई फोटो और अहम जानकारियां असद के मोबाइल पर भेजीं। उसने अदालत में उमेश पाल की गवाही बदलने की पूरी पटकथा भी लिखी थी। एमपी एमएलए की विशेष अदालत ने भी एक फैसले में लिखा था कि सौलत ने किस प्रकार उमेश पाल की गवाही बदलने में अहम भूमिका निभाई।