सजर प्रतिदिन बताता था कि उमेश किस समय निकला, उसके साथ कौन कौन था। किस समय वापस आया। हत्या वाले दिन भी सजर ने उमेश की पूरी मुखबिरी की थी।कटरा का रहने वाला अरशद कटरा, उमेश की हत्या संबंधित जो भी बैठकें अतीक के चकिया स्थित घर में होती थीं, सभी में शामिल होता था। पुलिस कमिश्नर का कहना था कि अरशद कटरा की और भी भूमिका थी, जिसकी जांच की जा रही है।
धूमनगंज का रहने वाला कैश अहमद 16 साल से अतीक अहमद के घर में ड्राइविंग करता है। हत्या के बाद असद और शाइस्ता ने गिरोह के असलहों और कैश को छिपाने की जिम्मेदारी दी थी।
कौशाम्बी के पश्चिम शरीरा का रहने वाला राकेश कुमार उर्फ लाला, अतीक के घर में पिछले 19 वर्षों से मुंशीगीरी करता था। अतीक का हिसाब किताब वही रखता था। हत्या के बाद शाइस्ता और असद ने राकेश को असलहा और कैश छिपाने की जिम्मेदारी दी थी। कैश और राकेश उर्फ लाला की निशानदेही पर ही अतीक के कार्यालय से नोटों, असलहों और कारतूसों का जखीरा पकड़ा था।
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फोरेंसिक जांच के लिए भेजे जाएंगे बरामद असलहे
असलहों का प्रयोग कहीं उमेश पाल हत्याकांड में तो नहीं किया गया, जबाव में पुलिस कमिश्नर का कहना था कि इसकी जांच की जा रही है। इन्हें फोरेंसिक जांच के लिए भेजा जाएगा। हत्याकांड में शूटरों ने पिस्टल, रायफल और बमों का प्रयोग किया था।