जीवन से निराश थी, गुरु से मिली नई राह: भैरवी नंद गिरि
साध्वी बनीं भैरवी नंद गिरि को अपने मूल माता-पिता का पता नहीं। आंखें खुली तो दूसरे माता-पिता पाया, लेकिन उन्होंने कभी मन से अपनाया नहीं। न शिक्षा-दीक्षा पर ध्यान दिया और न ही स्वास्थ्य पर। ब्रेन ट्यूमर ने अलग घेर रखा था। ऐसे में एक दिन आत्महत्या करने जा रही कि पास से गुजरते गुरु ने रोककर कारण पूछा और फिर आश्रम ले आए। आगे बारहवीं तक की पढ़ाई कराई। साथ ही ब्रेन ट्यूमर का इलाज भी। भैरवी बोलीं, अब आश्रम से जुड़कर अच्छा लग रहा है। समाज सेवा के अवसर मिले हैं। सनातन धर्म में सम्मान मिलना मेरे लिए और भी बहुत सुखद है।
असफलता से परेशान हो पकड़ी साधना की राह: मैना नंदगिरि
साध्वी मैना नंदगिरि बनीं आजमगढ़ की मैना देवी कश्यप का परिवार भी खेती-बारी से जुड़ा है। मैना ने एमए तक की शिक्षा हासिल करने के बाद बीएड भी किया। लगातार विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन करती और परीक्षाएं देती रहीं पर क हीं भी सफलता हाथ नहीं लगी। गहरी निराशा और आगे की राह न सूझने के दौरान एक दिन आजमगढ़ के लालगंज आश्रम पर ही गुरु कन्हैया प्रभु नंद से भेंट हुई और वहीं सनानत धर्म से जुड़ने का संकल्प ले लिया। कहती हैं, सनातन धर्म से जुड़कर समाज एवं शिक्षा के लिए काम करना सुखद है, लगता है जीवन सार्थक हो गया।