रेलवे ग्रुप डी की भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वाले दो और अभ्यर्थी बृहस्पतिवार को पकड़े गए। रेलवे भर्ती प्रकोष्ठ (आरआरसी ) कार्यालय में प्रमाणपत्रों की जांच के दौरान दो अभ्यर्थी पकड़े गए। फर्जीवाड़ा करने वाले दोनों अभ्यर्थियों ने लिखित रूप से अपनी गलती भी स्वीकार कर ली। बीते तीन दिन में इस तरह से कुल पांच अभ्यर्थी पकड़ में आ चुके हैं। इन पांचों को ही रेलवे की सभी भर्ती परीक्षाओं से डिबार कर दिया गया है।
दरअसल रेलवे ग्रुप डी की वर्ष 2018 में निकाली गई भर्ती परीक्षा के तहत आरआरसी प्रयागराज कार्यालय में 19 जुलाई से लिखित और शारीरिक परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच का काम शुरू हुआ है। 22 जुलाई तक चलने वाली इस प्रक्रिया में कुल 62 अभ्यर्थियों को बुलाया गया था। बृहस्पवितार 22 जुलाई को 12 अभ्यर्थियों को अपने प्रमाणपत्रों की जांच करवानी थी।
इस दौरान कुल छह अभ्यर्थी ही पहुंचे। सत्यापन के दौरान सत्यापन अधिकारी चंद्रशेखर को मनोज कुमार पुत्र रामसहाय निवासी भरतपुर राजस्थान और सुनील कुमार पुत्र इंद्रदेव निवासी आरा, बिहार पर शक हुआ। उन सभी को आरआरसी चेयरमैन अतुल मिश्र के समक्ष लाया गया। वहां कड़ाई से हुई पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया, उनके स्थान पर किसी और ने परीक्षा दी। लिखित रूप से उनका अपराध स्वीकार कर लिए जाने के बाद उक्त दोनों अभ्यर्थियों को रेलवे की सभी परीक्षाओं से डिबार करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। आरआरसी चेयरमैन अतुल मिश्र ने इसकी पुष्टि की है।