चौफटका में एक दिन पहले हुए तिहरे हत्याकांड को लेकर दूसरे दिन शहर में जमकर हंगामा हुआ। घटना से आक्रोशित परिजनों व स्थानीय लोगों ने पोस्टमार्टम के बाद शव रखकर प्रयागराज-कानपुर हाईवे जाम कर दिया। वह 50 लाख मुआवजा व नौकरी की मांग कर रहे थे। इस दौरान पुलिस से तीखी नोकझोंक के साथ ही धक्कामुक्की भी हुई। उचित मुआवजे व अन्य मांगें शासन तक पहुुंचाने के आश्वासन के बाद लोग शांत हुए। तब जाकर करीब चार घंटे बाद हाईवे पर यातायात सुचारू हो सका।
चौफटका मेें हुए नृशंस हत्याकांड में मारे गए लालू यादव, अजीत पासी व करन पासी के शवों का पोस्टमार्टम सोमवार दोपहर बाद शुरू हुआ। पंचायतनामा की कार्रवाई में ही दो बज गए थे। दो बजे के बाद शुरू हुुआ पोस्टमार्टम शाम पांच बजे तक चला। इस दौरान पोस्टमार्टम में देरी को लेकर मर्चरी के बाहर जुटे परिजनों व परिचित नाराजगी जताते रहे। उधर शव घर लाए जाने का इंतजार कर रहे परिजन व स्थानीय लोग शाम चार बजे के करीब ही प्रयागराज-कानपुर हाईवे की एक लेन पर आकर बैठ गए जिससे उस पर आवागमन बाधित हो गया। यह देख वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने हाईकोर्ट कॉलोनी के सामने बैरिकेडिंग कर दूसरी लेन पर यातायात डायवर्ट कर दिया। पोस्टमार्टम में देरी पर यहां भी परिजन बार-बार आक्रोशित होते रहे। इस दौरान सपा नेता रिचा सिंह भी समर्थकों संग मौके पर पहुंच गई थीं। 5.30 बजे के करीब मौके पर जमा लोगों ने दूसरी लेन भी जाम कर दी। पुलिस अफसर समझाते रहे लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई।
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dhoomanganj triple murder case
- फोटो : प्रयागराज
6.30 बजे के करीब मृतक लालू व अजीत के शव लाए गए तो परिजनों में चीख-पुकार मच गई। आक्रोशित स्थानीय लोगों ने शव सड़क पर रखकर तीसरी लेन भी जाम करने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोकना चाहा। जिस पर पहले तीखी नोकझोंक व फिर धक्कामुक्की भी हुई। हालांकि पुलिसकर्मियोें को धक्का देकर आक्रोशित लोग चौफटका ओवरब्रिज के पास पहुंचे और शव रखकर हाईवे जाम कर दिया। यह देख पुलिस अफसरों के हाथ-पांव फूल गए। मौके पर पहुंचे पुलिस के साथ ही प्रशासनिक अफसर मान-मनौव्वल में जुटे रहे। आक्रोशित लोग मृतकों के परिवार को 50 लाख मुआवजा व नौकरी की मांग करते रहे। एसडीएम सिटी अशोक कनौजिया ने नौकरी की बात से तो इंकार कर दिया लेकिन शासन की ओर से स्थापित विभिन्न मदों से उचित मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया तब करीब 7.45 बजे लोग जाम खत्म करने को तैयार हुए। तब जाकर करीब चार घंटे बाद हाईवे पर यातायात बहाल हो सका।
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छावनी में तब्दील रहा चौफटका
उधर घटना के बाद तनाव को देखते हुए रात में ही मौके पर फोर्स तैनात कर दी गई थी। पोस्टमार्टम के बाद शव लाए जाने पर बवाल की पूरी आशंका थी जिसे देखते हुए दोपहर में ही अतिरिक्त फोर्स की तैनाती की जाने लगी। शाम चार बजे तक चौफटका से लेकर नेहरू पार्क तक का इलाका छावनी में तब्दील हो चुका था। एसपी सिटी बृजेश कुमार श्रीवास्तव, एसपी यमुनापार, एसपी प्रोटोकॉल कई सीओ व शहर व यमुनापार के कई थानों की फोर्स के साथ मौके पर जमा रहे। इसके अलावा आईटीबीपी व पीएसी की भी एक टुकड़ी तैनात की गई थी। बवाल की आशंका थी ऐसे में फायरब्रिगेड के जवान भी मुस्तैद किए गए। उधर सिविल लाइंस से लेकर नेहरू पार्क तक बड़ी संख्या में ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को भी तैनात रहे।
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मासूम बेटा पूछता रहा सवाल, कब आएंगे पापा
उधर मृतक लालू के घरवालों का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी छवि तो रोते-रोते बेहोश हुए जा रही थी। उसके दो बच्चों में बेटा अविरल(9) और बेटी आराध्या(3) साल की है। परिजनों ने बताया कि आराध्या ऑटिज्म से पीड़ित है। उधर मासूम बेटा बार-बार मां से पूछता रहा कि पापा कब आएंगे। उसके साथ मृतक की मां व बहनों के साथ अन्य रिश्तेदार महिलाएं भी फूट-फूटकर रोती रहीं। उनका कहना था कि अब उनका परिवार कौन पालेगा। बताया कि मृतक लालू अपने परिवार का इकलौता कमाऊ सदस्य था। पत्नी व दो बच्चों के साथ ही दो अविवाहित बहनों व मां माया की जिम्मेदारी भी उस पर थी। उधर अन्य मृतक अजीत व करन के घरों में भी कोहराम मचा रहा। दोनों अविवाहित थे।
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क्षतिग्रस्त हो गई थीं दोनों के सिर की हड्डियां
प्रयागराज। चौफटका में मारे गए लालू यादव व अजीत के सिर में कई गोलियां मारी गई थीं। इसके अलावा उन पर चापड़े से भी हमला किया गया था। सोमवार को पोस्टमार्टम के दौरान यह बात सामने आई। सूत्रों के मुताबिक, कई गोलियां लगने से लालू व अजीत के सिर की लगभग सभी हड्डियां क्षतिग्रस्त हो गई थीं। लालू पर चापड़ से भी वार किया गया था। जिससे उसके हाथ में गंभीर चोट पहुंची थी। उधर तीसरे मृतक करन को एक गोली मारी गई थी जो सीने को चीरते हुए पार हो गई थी। हालांकि गोली लगने से उसका फेफड़ा क्षतिग्रस्त हो गया था।
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चौफटका में हुए तिहरे हत्याकांड में धूमनगंज पुलिस की लापरवाही की अहम भूमिका रही। सोमवार को यह बात भी सामने आई कि मामले में 15 दिन पहले ही थाने के एक दरोगा ने जांच कर रिपोर्ट इंस्पेक्टर को सौंप दी थी। इसके बावजूद विवाद के निस्तारण के संबंध में कोई गंभीर कदम नहीं उठाया गया। चौफटका में रास्ते के विवाद को लेकर पुलिस से कई बार शिकायत की गई। दोनों पक्षों की ओर से प्रार्थना पत्र थाने में दिए गए। जिसके बाद उनके बीच कई बार पंचायत भी हुई।
बताया जा रहा है कि 15 दिन पहले शिकायत मिलने पर धूमनगंज थाने के एक दरोगा ने मौके पर पहुंचकर जांच भी की थी। साथ ही उसने रिपोर्ट भी इंस्पेक्टर को दी। लेकिन इसके बावजूद मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। चर्चा तो यह भी है कि दरोगा की जांच रिपोर्ट मिलने के बाद इंस्पेक्टर की ओर से एक अन्य दरोगा से दोबारा जांच कराई गई। दोनों दरोगाओं की ओर से बताया गया कि रास्ते के विवाद को लेकर दोनों पक्षों में तनाव है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसके बावजूद विवाद के निस्तारण के संबंध में उचित कार्रवाई नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि तीन फीट के रास्ते के विवाद में तीन लोगों की जान ले ली गई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि दोनोें पक्षों पर दो बार निरोधात्मक कार्रवाई की गई। पहली बार 22 जुलाई व घटना से तीन दिन पहले भी उन्हें 107/16 के तहत पाबंद किया गया। हालांकि सवाल यह है कि पाबंद किए जाने के बाद भी नहीं मानने पर दोनों पक्षों के खिलाफ आगे की कार्रवाई क्यों नहीं की गई। सीओ सिविल लाइंस व्रजनारायण सिंह का कहना है कि पुलिस ने दोनों पक्षों को पाबंद किया था। इस बात की आशंका नहीं थी कि ऐसी वारदात कर दी जाएगी।