प्रयागराज। जलस्तर में लगातार वृद्धि के चलते सोमवार को गंगा-यमुना चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गई। दारागंज सब्जी मंडी जाने वाली सड़क तक पानी आ गया। दशाश्वमेध, रामघाट, वीआईपी किला घाट डूब गए। तटवर्ती इलाके की बस्तियों में पानी भरने से जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। तीर्थपुरोहितों, पंडों की चौकियां अब बेनी बांध पर आ गई हैं। कछार से लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। इस बीच हरिद्वार, नरोरा और कानपुर बैराजों से गंगा में चार लाख क्यूसेक से अधिक पानी फिर छोड़ दिया गया। इससे बाढ़ प्रभावित इलाकों में मुश्किलें और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। गंगा-यमुना चेतावनी बिंदु 83.73 मीटर से 1.19 मीटर और खतरे के निशान से दो मीटर नीचे बह रही है।
शाम छह बजे सिंचाई बाढ़ खंड के कंट्रोल रूम से जारी बुलेटिन के अनुसार गंगा का जलस्तर फाफामऊ में 82.54 मीटर, छतनाग में 81.91 मीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 82.44 मीटर रिकार्ड किया गया। गंगा-यमुना में 3.50 सेमी प्रतिघंटा और यमुना में दो सेमी प्रति घंटा की रफ्तार से वृद्धि हो रही है। एमपी के बांधों से छोड़ा गया पानी अब सिमटने लगा है, लेकिन हथिनी कुंड से यमुना में छोड़ी गई भारी जलराशि हफ्ते भर के भीतर यहां फिर असर दिखा सकती है।
गंगा में सोमवार को हरिद्वार से 1.69 लाख 630 क्यूसेक, नरोरा से 94,402 हजार क्यूसेक और कानपुर से 1.43 लाख 952 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। जलस्तर में लगातार वृद्धि के चलते बेनी बांध के नीचे वाली सड़क डूब गई। इससे घाटों का एक-दूसरे से संपर्क टूट गया है। श्मशान घाट पर पानी भर गया है। दारागंज, नागवासुकि, शिवकुटी, रसूलाबाद, बाघाड़ा, चांदपुर, सलोरी, बेली की कछारी बस्तियों में बाढ़ से लोग लगातार घर छोड़कर दूसरी जगहों पर शरण ले रहे हैं। बेनी बांध के निकट बसे लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
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तटवर्ती इलाकों में खलबली मची है।
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पानी रिहायशी इलाकों की ओर बढ़ रहा है।
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लोग अपना सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे हैं।
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पानी भर जाने से घरों के कमजोर होने का खतरा पैदा हो गया है।
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घाटों पर दुकान चलाने वालों के समक्ष रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया है।