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ट्रेनों को कोहरे से बचाएगा फॉग सेफ डिवाइस

Wed, 10 Dec 2014 11:56 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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घने कोहरे से दो-दो हाथ करने के लिए रेलवे फॉग सेफ डिवाइस के इस्तेमाल की तैयारी कर रहा है। ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम आधारित इस उपकरण का ट्रायल कोहरे से प्रभावित नार्दन रेलवे, नार्थ ईस्टर्न रेलवे और नार्थ वेस्टर्न रेलवे क्षेत्र में शुरू हो गया है। इसके जरिए सिगनल न दिखने जैसी ड्राइवरों की समस्या का समाधान किया गया है। सिगनल आने के एक किमी पहले ही यह ड्राइवरों को चेतावनी देता है। दावा है कि अब तक तीनों जोनल रेलवे में ड्राइवरों के लिए इसका प्रयोग शानदार रहा है। नए फॉग सेफ डिवाइस को पोर्टेबल बनाया गया है, जिससे इसे किसी भी इंजन में रखा जा सकता है।
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कोहरा घना होते ही ट्रेनों को चलाने में रेलवे के लिए मुश्किल खड़ी होने लगती है। दिसंबर से फरवरी के लिए बड़ी संख्या में ट्रेनों को निरस्त भी किया जा रहा है। जो ट्रेनें चलती हैं उनके यात्री भी गंतव्य के लिए दूसरे-तीसरे दिन पहुंचते हैं। पिछले सप्ताह दो दिन पड़े कोहरे ने भी इसका असर दिखाया। कोहरे से हार चुके रेलवे को फॉग सेफ डिवाइस में इससे लड़ने की संभावना दिख रही है। 1381 पोर्टेबल डिवाइस का इंजनों में प्रयोग शुरू हो चुका है। उत्तर रेलवे में 1018 फॉग सेफ डिवाइस इंजनों में लगाए गए हैं। इसके जरिए दृष्यता कम होने पर ट्रेन ड्राइवरों को सिगनल के एक किमी पहले ही बजर के जरिए अलर्ट मिल जाता है कि सिगनल आने वाला है। सो, ड्राइवर सतर्क होकर सिगनल पर निगाह रखते हैं। अफसर बताते हैं कि जिन इंजनों में इसे इस्तेमाल किया जा रहा है उनकी रफ्तार सामान्य से थोड़ा कम होती है। जिन इंजनों में इस्तेमाल नहीं है उनके ड्राइवरों को 10 से 30 किमी की गति से ट्रेन चलाना पड़ता है।

नीरज शर्मा, सीपीआरओ, उत्तर रेलवे ने बताया कि जीपीएस आधारित इस डिवाइस में रूट की मैपिंग की गई है। इसमें रूट के सभी सिगनल की जानकारी है। सिगनल के एक किमी पहले ही बजर बजने लगता है। यह ओवर स्पीड को भी नियंत्रित करता है। बोर्ड और आरडीएसओ इसकी निगरानी कर रहे हैं।’
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