हाल ही में हुई पुलिस और पीएसी में करीब 60 हजार आरक्षियों की भर्ती के मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा है कि बिना चरित्र सत्यापन के आरक्षियों को प्रशिक्षण पर भेजना अनुचित है। चरित्र सत्यापन से पूर्व प्रशिक्षण पर भेजने के एकल न्यायपीठ के आदेश को खंडपीठ ने गलत करार दिया है। प्रदेश सरकार ने एकलपीठ के आदेश को विशेष अपील में चुनौती दी थी। अपील पर न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई की।
प्रदेश सरकार की ओर से स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश आर्म्ड कांस्टेबुलरी अधीनस्थ सेवा तृतीय संशोधन नियमावली में भी यह व्यवस्था है कि चरित्र सत्यापन के बाद ही आरक्षियों को नियुक्ति दी जाएगी, इसके पश्चात प्रशिक्षण पर भेजे जाएंगे। मौजूदा मामले में याची संदीप कुमार हरिजन का पीएसी 2013 भर्ती में चयन हुआ। उसे सीतापुर प्रशिक्षण के लिए भेजा जाना था। चरित्र सत्यापन से पता चला कि उसके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज है मगर उसने इस जानकारी छिपा लिया था।
विभाग ने उसे प्रशिक्षण पर भेजने से इंकार कर दिया। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। एकल पीठ ने उसे प्रशिक्षण पर भेजने का आदेश देते हुए कहा कि डीएम द्वारा कराए गए चरित्र सत्यापन के परिणाम पर उसकी नियुक्ति निर्भर करेगी। बाद में ऐसे कई मामले सामने आए जिनमें आपराधिक मुकदमा होने के आधार पर विभाग ने चयनित आरक्षियों को प्रशिक्षण पर जाने से रोक दिया। इन मामलों में एकल पीठों से ऐसे ही आदेश पारित हुए थे।