माघ मेला में सुबह की पुरवइया और दोपहर के बाद शुरू हुई पछुआ से न केवल श्रद्धालुओं में सिरहन पैदा कर रही थी बल्कि गंगा, यमुना दोनों नदियों की लहरें भी तेज हो गई थी। तेज लहरों से नावों का चलना दिन भर मुश्किल रहा। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस प्रशासन संगम नोज पर इस बात को लगातार एनाउंस भी करता रहा।
तेज हवाओं से गंगा और यमुना दोनों नदियों पर धाराएं तेज थी।
गंगा के मुकाबले यमुना की लहरें तेज उठ रहीं थी, जिसे दूर से देखकर ही कुछ श्रद्धालु उस तरफ जाने से डर रहे थे। हालांकि कुछ श्रद्धालुओं में जोश अधिक दिखा। लोगों नाव से यमुना, गंगा सहित संगम की सैर भी की और पूजन-अर्चन भी किया। ऐसे में कोई हादसा न हो जाए इसको देखते हुए पुलिस प्रशासन न केवल श्रद्धालुओं को सचेत कर रहा था बल्कि नाविकों को भी निर्देशित कर रहा था कि वह नावों में ज्यादा श्रद्धालुओं को न बठाएं। पुलिस की निर्देश पर नाविक भी सचेत थे। हादसे से बचने के लिए उन्होंने 12 श्रद्धालुओं की बजाय तीन-चार को ही बैठाया।