10 मार्च 2019 को याचिकाकर्ता ने मेसर्स सहाय एंड संस उरई को टीएमटी बार्स (सरिया) की एक खेप बेची थी। इसी दिन दोपहर में गल्ला मंडी, उरई में वाणिज्य कर विभाग के मोबाइल दस्ते ने वाहन को रोककर जांच का आदेश दिया।
इस दौरान काफी देर बाद ई-वे बिल व इनवॉइस प्रस्तुत किया गया। ऐसे में अधिकारियों ने 14 मार्च 2019 को कर और जुर्माने का आदेश पारित किया। याचिकाकर्ता ने कर और जुर्माने के रूप में 3,97,224 रुपये की राशि जमा की और एडिशनल कमिश्नर वाणिज्य कर, झांसी के यहां अपील दायर की लेकिन राहत न मिलने पर याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
कोर्ट ने कहा, याचिकाकर्ता चालान और ई-वे बिल की अनुपस्थिति का उचित कारण स्पष्टीकरण के साथ नहीं बता सका, इसलिए वह कर चोरी की धारणा का खंडन करने में सक्षम नहीं है। कोर्ट ने अधिकारियों की ओर से उठाए गए कदम को उचित और कानून के अनुसार सही मानते हुए हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया। साथ ही याचिका खारिज कर दी।