इस कमेटी की रिपोर्ट छह महीने पूर्व प्रस्तुत की गई थी। रिपोर्ट में पांडुलिपियों, ताड़पत्रों और पेंटिंग के जमीन पर पड़े होने को लेकर कंजर्वेटर श्वेता सिंह की टिप्पणी को मिटाकर वहां दूसरी टिप्पणी लिख दी गई है। इतना ही नहीं कंजर्वेटर के हस्ताक्षर को उठाकर टिप्पणी के नीचे पेस्ट कर दिया गया है। कमेटी की जांच आख्या को बदलकर नए सिरे से चार बिंदुओं की रिपोर्ट बनाई गई है। इस रिपोर्ट में रिजर्व कमरे को चैंबर बताया गया है।
दूसरी रिपोर्ट में बचाव करते हुए यह भी लिखा गया है कि दीमक का उपचार पूर्व में सहायक रसायनज्ञ द्वारा किया जा चुका है। पता चला है कि बाद में अवकाश के दिन उस कमरे को खोल कर कुछ सामग्रियों को हटाया भी गया, ताकि लापरवाही पर पर्दा डाला जा सके। संग्रहालय के सहायक मीडिया प्रभारी सुशील शुक्ला का कहना है कि रिपोर्ट बदले जाने की हमें जानकारी नहीं है। इसे उच्चाधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा।