कॉलेज प्रशासन ने नियमों के तहत खुद की जरूरत बताते हुए लीड और दुकानों का आवंटन निरस्त कर दिया। नोटिस जारी कर 48 घंटे में दुकानें खाली करने को कहा गया था, लेकिन संचालकों ने पहल नहीं की। दो दुकानों की तीन साल की लीज बाकी थी, जबकि पीतांबरा ने बीते मार्च माह में अनुबंध फिर से कराया था।
सोमवार दोपहर बाद पीडीए के जोनल अफसर सत् शुक्ला की अगुवाई में पहुंची टीम में दो जेसीबी मशीनें शामिल थीं। पुलिस और पीएसी की मौजूदगी में ताबड़तोड़ कार्रवाई कर तीनों मेडिकल स्टोर ध्वस्त करा दिए गए। इस दौरान कुछ लोगों ने विरोध करने की कोशिश की जिसे पुलिस ने नाकाम कर दिया। हुल्लड़ मचा रही भीड़ में शामिल लोगों को लाठी पटककर खदेड़ दिया गया।
कार्रवाई के दौरान प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह शहर के बाहर थे। सूचना पर उप प्राचार्य डॉ. विनोद पांडेय अन्य सहयोगियों के साथ पहुंचे, लेकिन ध्वस्तीकरण के दौरान गुहार लगा रहे दुकानदारों की एक नहीं सुनीं।
पीसीओ को छोड़ा, जहां मूल काम ही नहीं, लगी है फोटो स्टेट मशीन
तीन मेडिकल स्टोरों के साथ एसआरएन अस्पताल के गेट पर ढाई दशक पहले लीज पर आवंटित पीसीओ को कार्रवाई से अलग कर दिया गया। ध्वस्तीकरण की जद में आए मेडिकल स्टोर संचालकों का आरोप है कि वहां पीसीओ है ही नहीं। पीसीओ के नाम पर फोटो स्टेट किया जाता है। वहां कोल्डड्रिंक के साथ चाय-काफी बिकती है। मूल काम गायब है, दूसरा व्यापार हो रहा लेकिन कॉलेज प्रशासन को यह नहीं दिखता। जबकि इसी पीसीओ के कारण कुंभ के दौरान एसआरएन का गेट नंबर एक बंद नहीं किया जा सका था। लोगों ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की जांच कराकर कार्रवाई कराने की मांग की है।