इसी पार्क में निषादराज से मिलते हुए भगवान श्रीराम की प्रतिमा की स्थापना की जाएगी। वहां तक जाने के लिए चार सौ मीटर आरसीसी सड़क का भी निर्माण होगा। इसके अलावा पर्यावरण की शुद्धता बनाए रखने के लिए विद्युत शवदाह गृह का भी निर्माण कराया जाएगा। पर्यटन विभाग ने शृंगवेरपुर धाम की महत्ता के अनुरूप वहां के आध्यात्मिक पर्यटन के विकास की योजना बनाई है।
वहां पर मां गंगा केतट पर माता शांता व शृंगी ऋषि की तपोभूमि व आश्रम को और भव्यता प्रदान की जाएगी। मान्यता के अनुसार त्रेता युग में पुत्र रत्न की प्राप्ति की इच्छा से राजा दशरथ ने शृंगी ऋषि के आश्रम में पुत्रेष्ठि यज्ञ कराया था। कहा जाता है कि शृंगी ऋषि के आचार्यत्व में हुए इस यज्ञ केफल स्वरूप ही दशरथ को भगवान राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न नामक चार पुत्रों की प्राप्ति हुई थी।
- मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने वन गमन के दौरान शृंगवेरपुर धाम में ही सीता व लक्ष्मण के साथ रात को प्रवास किया था और दूसरे दिन नाव से गंगा पार हुए थे। इतना ही नहीं निषादराज का आतिथ्य स्वीकार करते हुए उन्हें गले लगाकर छुआछूत का भेद मिटाते हुए सामाजिक समरसता का संदेश दिया था। शृंगवेरपुर में मुखवती गंगा हैं। वहां गंगा और सीता संवाद के भी प्रमाण मिले हैं। -दिनेश कुमार, उप निदेशक पर्यटन।