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श्रृंगवेरपुर में निषादराज से गले मिलते दर्शन देंगे प्रभु श्रीराम, लगेगी भव्य प्रतिमा

Sun, 29 Nov 2020 07:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

  1. 25 करोड़ रुपये की लागत से शृंगवेरपुर धाम को संवारेगा पर्यटन विभाग
  2. 04 परियोजनाओं के तहत होगा भगवान राम से जुड़े तीर्थ का विकास
  3. 10 एकड़ क्षेत्रफल में होगा निषादराज पार्क का निर्माण


शृंगवेरपुर के मेले और लोकोत्सव
  • कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक -राष्ट्रीय रामायण मेला।
  • आषाढ़ सप्तमी पर तीन दिवसीय मेला
  • प्रत्येक पूर्णिमा व अमावस्या का मेला
  • हर शुक्रवार, सोमवार का मेला
  • नवरात्रि का मेला
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
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विस्तार
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गंगा तट पर शृंगवेरपुर धाम में निषादराज से प्रभु श्रीराम के गले मिलने की युगों पुरानी दास्तां को योगी आदित्यनाथ सरकार आने वाली पीढ़ियों के लिए यादगार बनाएगी। इसके लिए शृंगवेरपुर धाम में निषादराज से गले मिलते भगवान राम की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शासन ने इस योजना को मंजूरी दे दी है। इसके तहत यहां लगने वाले रामायण मेले के अलावा लोकोत्सवों को भी संरक्षित किया जाएगा।

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अयोध्या की तरह प्रयागराज के शृंगवेरपुर धाम में भगवान राम की भव्य प्रतिमा लगाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है।पर्यटन विभाग की इस अहम परियोजना पर मुहर लगने केसाथ ही अब जल्द काम शुरू होगा। इस परियोजना के तहत शृंगवेरपुर में 10 एकड़ क्षेत्रफल में निषादराज पार्क का निर्माण कराया जाएगा।

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prayagraj news - फोटो : prayagraj
इसी पार्क में निषादराज से मिलते हुए भगवान श्रीराम की प्रतिमा की स्थापना की जाएगी। वहां तक जाने के लिए चार सौ मीटर आरसीसी सड़क का भी निर्माण होगा। इसके अलावा पर्यावरण की शुद्धता बनाए रखने के लिए विद्युत शवदाह गृह का भी निर्माण कराया जाएगा। पर्यटन विभाग ने शृंगवेरपुर धाम की महत्ता के अनुरूप वहां के आध्यात्मिक पर्यटन के विकास की योजना बनाई है।

वहां पर मां गंगा केतट पर माता शांता व शृंगी ऋषि की तपोभूमि व आश्रम को और भव्यता प्रदान की जाएगी। मान्यता के अनुसार त्रेता युग में पुत्र रत्न की प्राप्ति की इच्छा से राजा दशरथ ने शृंगी ऋषि के आश्रम में पुत्रेष्ठि यज्ञ कराया था। कहा जाता है कि शृंगी ऋषि के आचार्यत्व में हुए इस यज्ञ केफल स्वरूप ही दशरथ को भगवान राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न नामक चार पुत्रों की प्राप्ति हुई थी।
 
  • मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने वन गमन के दौरान शृंगवेरपुर धाम में ही सीता व लक्ष्मण के साथ रात को प्रवास किया था और दूसरे दिन नाव से गंगा पार हुए थे। इतना ही नहीं निषादराज का आतिथ्य स्वीकार करते हुए उन्हें गले लगाकर छुआछूत का भेद मिटाते हुए सामाजिक समरसता का संदेश दिया था। शृंगवेरपुर में मुखवती गंगा हैं। वहां गंगा और सीता संवाद के भी प्रमाण मिले हैं।  -दिनेश कुमार, उप निदेशक पर्यटन।
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